
रायपुर, 26 अप्रैल . छत्तीसगढ़ के पूर्व उपChief Minister और कांग्रेस नेता त्रिभुवनेश्वर शरण सिंहदेव (टीएस सिंहदेव) ने राघव चड्ढा के भाजपा में शामिल होने, धीरेंद्र शास्त्री के बयान और भाजपा की नीतियों को लेकर से बातचीत की. पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:-
सवाल: Friday को राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल समेत सात सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़ दी. राघव चड्ढा ने कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और उन्हें साइलेंस किया गया. आप इस घटनाक्रम को कैसे देखते हैं?
जवाब: यह भारतीय जनता पार्टी की चिरपरिचित ऑपरेशन लोटस की एक और मिसाल है. दुख और दुर्भाग्य देश के लिए इस बात का है कि नीति-नियत और सिद्धांत गौण हो जा रहे हैं. एन केन एन प्रकरण सत्ता में हम कैसे बनें, हम लाभ कैसे ले सकें, ये एक के बाद एक मिसालें सामने आती जा रही हैं. देश का Political चरित्र बहुत तेजी से गिरा हुआ है, इस बात का दुख है.
भाजपा में शामिल होने वाले राघव चड्ढा पहले भारतीय जनता पार्टी को गुंडों की जमात कहते थे. जिनके विरुद्ध खुलकर नीतिगत बोलते थे, आज उसी पार्टी का दाम थान लिया और कह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक गई है. अगर ऐसा है तो राघव को अपनी पार्टी बनाते या और कुछ और विकल्प देखते, लेकिन जिनके चुनाव लड़कर जनप्रतिनिधि बने, उसी पार्टी का दामन थाम लिया. ऐसे करके राघव देश ने देश के सामने अवरवादिता का सिद्धांत रखा. इसी तरह कुछ और लोग भी हैं, जो पहले पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ बोलते थे. इसका उदाहरण है कि अजित पवार, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं. इनका सत्तर हजार करोड़ रुपए का घोटाला था, लेकिन एनडीए में उपChief Minister बन गए तो सब ठीक हो गया.
स्वाति मालीवाल तो पहले से केजरीवाल के विपरीत बहुत कुछ बोलकर फिर भी आम आदमी पार्टी में डटी रहीं. ये कौन सी नैतिकता या सिद्धांत है? ऐसे बहुत लोग हैं जो पहले भाजपा और उनके नेताओं के खिलाफ बोलते थे, आज उनके साथ बैठे हैं लेकिन खुश नहीं होंगे. किसी की जुबान नहीं खुल रही.
सवालः कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल का दावा है कि आने वाले दिनों में आप के कई विधायक भी पार्टी छोड़ सकते हैं. राघव चड्ढा के संपर्क में हैं. इसे कैसे देखते हैं?
जवाबः मैंने आपको बताया कि ऑपरेशन लोट्स के तहत पैसों, संविधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग के बल पर और अवसरवादिता को बढ़ावा देकर वह (भाजपा) तो किसी हद तक जाने को तैयार है. पूरे देश एसआईआर प्रक्रिया शुरू करके लोगों को परेशान किया, जबकि शुरू से दिख रहा था कि पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए यह शुरू किया गया था. पश्चिम बंगाल में चुनाव कराने के लिए 3 लाख अर्धसैनिक बल भेज दिए. पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान मुस्लिम धर्म के लोगों के नाम बड़ी संख्या में काटे गए.
दुर्भाग्य इस देश का है कि Supreme Court कहती है कि क्या हो गया, इस बार नहीं तो अगली बार वोट दे देना. केंद्र Government ने चालाकी की सारी हदें पार कर दी. आपने पूरा खेल कर रखा है और फिर निष्पक्ष चुनाव की बात करते हैं. सत्ता चाहिए तो लोगों का समर्थन लेकर आइए. भले ही वह कांग्रेस की हो, मैं भी उसका सम्मान करूंगा, लेकिन जनता के भरोसे जीतकर आना ही लोकतंत्र में सम्मानजनक होता है.
इस तरह जोड़-तोड़ करके, कहीं किसी को फायदा देकर, कहीं दबाव बनाकर, कहीं ईडी भेजकर जीत हासिल करना सही नहीं है. आज चुनाव हो रहे हैं और वहां पीडीएस की दुकानों तक ईडी पहुंच रही है. यह क्या हो रहा है? फिर भी मैं आशावादी हूं. संस्थाओं का कितना भी दुरुपयोग हो, मुझे विश्वास है कि देश की जनता अंततः सब संभाल लेगी.
सवालः आई-पैक के मामले पर Supreme Court ने ममता बनर्जी को फटकार लगाई है. इस पर क्या कहेंगे?
जवाबः जहां तक Supreme Court का सवाल है, मुझे लगता है कि उसका बयान सिक्के का केवल एक पहलू है. जो बातें पूरी दुनिया देख रही है कि एजेंसियों का किस तरह उपयोग हो रहा है, उस पर भी टिप्पणी होनी चाहिए थी. मैं उस टिप्पणी से पूरी तरह सहमत नहीं हूं. अगर ममता बनर्जी ने कोई कदम उठाया, तो उस पर सवाल उठाना उचित है, लेकिन जब किसी को पूरी तरह दबा दिया जाए, तो प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है. लोकतंत्र की हत्या कौन कर रहा है, यह भी देखना जरूरी है. ईडी को मिले अधिकारों का जिस तरह उपयोग हो रहा है, उस पर भी गंभीर सवाल हैं. किसी को भी कभी भी गिरफ्तार कर लेना और लंबे समय तक जेल में रखना, जबकि सजा की दर बहुत कम है, यह चिंता का विषय है. मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और उद्योगपतियों तक को जेल में डाला जा रहा है. यह स्थिति लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है. Supreme Court को इस मुद्दे के दूसरे पहलू पर भी ध्यान देना चाहिए था.
सवालः धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बयान दिया है कि हिंदू चार बच्चे पैदा करें और एक बच्चे को आरएसएस को सौंप दें. इस तरह के बयानों पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? क्या इससे समाज में गलत संदेश जाता है?
जवाबः जहां तक जनसंख्या की बात है, देश पहले ही 145 करोड़ की आबादी पार कर चुका है. अमेरिका की तुलना में हमारी प्रति व्यक्ति आय बहुत कम है. ऐसे में और बच्चे पैदा करो, जैसी बातें व्यावहारिक नहीं हैं. परिवार में संसाधन सीमित होते हैं, दो बच्चे हों या छह, इसका सीधा असर जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है. ऐसे में गैर-जिम्मेदार बयान देना उचित नहीं है. आज देश में दिखावे और प्रचार पर ज्यादा ध्यान है. गंभीर मुद्दों पर ठोस प्रतिक्रिया नहीं दिखती. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अगर India के बारे में गलत टिप्पणी होती है, तो उस पर मजबूत जवाब दिया जाना चाहिए.
सवालः Prime Minister Narendra Modi ने पश्चिम बंगाल में हुगली नदी में नाव यात्रा की, जिस पर ममता बनर्जी ने कहा कि अगर दम है तो यमुना में डुबकी लगाकर दिखाएं. नमामि गंगे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के बावजूद विपक्ष सवाल उठा रहा है कि नदियों की सफाई जमीनी स्तर पर पूरी तरह नहीं दिख रही. आप इस पूरे मुद्दे को कैसे देखते हैं?
जवाबः इनका तरीका ही है, बड़बोलेपन के साथ बड़ी-बड़ी बातें करना और कमियों को ढांक देना. Narendra Modi हुगली में नाव पर बैठकर कैमरा हाथ में लेकर फोटो खिंचवा रहे हैं. यह किसी फिल्मी शूट की तरह दिखता है. Prime Minister और उनकी टीम प्रचार पर ज्यादा ध्यान दे रही है. दूसरी तरफ अमेरिका के President ने कहा कि हिंदुस्तान नर्क का गड्ढा और Prime Minister हुगली में फोटो खींचने में व्यस्त हैं, कोई जवाब नहीं दे रहे हैं. Prime Minister को ट्रंप से कहना चाहिए था कि हमारी India माता से माफी मांगो.
हमारे नागरिकों को हथकड़ियों में भेजे जाने की घटनाएं सामने आती हैं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के दबाव बनते हैं, टैक्स, व्यापार, और तेल को लेकर शर्तें थोपी जाती हैं, लेकिन Government की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया नहीं दिखती. यहां तक कि ईरान की ओर से जहाजों पर हमले जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं, लेकिन उस पर भी स्पष्ट रुख नहीं दिखता. ऐसे में सवाल उठता है कि देश की प्राथमिकताएं क्या हैं, प्रचार या वास्तविक मुद्दे?
मैं यह नहीं कह रहा कि Prime Minister से मेरी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी है, लेकिन मेरा मानना है कि देश का Prime Minister ऐसा होना चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की गरिमा की रक्षा करे. अगर कोई विदेशी नेता हमारे देश को अपमानजनक शब्द कहता है, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय संबंध गरिमा और सम्मान पर आधारित होते हैं. अगर India माता के लिए अपमानजनक शब्द कहे जाएं और हम चुप रहें, तो यह देश की छवि के लिए ठीक नहीं है.
सवालः ईडी की जांच में दावा किया गया है कि छत्तीसगढ़ में लगभग 95 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग धर्मांतरण के लिए हुई. इस मामले को आप कैसे देखते हैं?
जवाबः मैं बचपन से यह देखता आ रहा हूं और हम लोग इस बात को जानते भी हैं कि ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाले कई बच्चों की पढ़ाई का खर्च अमेरिका के परिवारों द्वारा उठाया जाता है. इसमें कोई नई बात नहीं है, इसके लिए किसी ईडी की जांच की जरूरत नहीं थी. यह उनके सामाजिक कार्य का एक तरीका है, जैसे अन्य लोग भी अपने-अपने तरीके से समाजसेवा करते हैं. लेकिन सवाल यह है कि ऐसी स्थिति पैदा क्यों हो रही है? धर्मांतरण किन लोगों का हो रहा है? मेरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उन्हीं वर्गों में धर्मांतरण हुआ है, जिन्हें कभी सामाजिक रूप से अलग-थलग रखा गया.
आजादी के बाद के समय की बात कर रहा हूं, जब अगर वे लोग किसी के घर में साथ बैठकर खाना खा लेते थे, तो यह चर्चा का विषय बन जाता था. पिछले 40–50 साल में हमने खुद यह बदलाव देखा है. उन्होंने क्या किया? स्कूल खोले, अस्पताल खोले, सेवा के माध्यम से लोगों तक पहुंचे और उन्हें प्रभावित किया और हम क्या कर रहे हैं? हम समाज में विभाजन और घृणा बढ़ाने में लगे हैं. अगर कोई समुदाय सेवा के जरिए लोगों के जीवन में बदलाव ला रहा है, तो हमें आत्ममंथन करना चाहिए कि हम कहां पीछे रह गए. जहां तक फंडिंग या अन्य आरोपों की बात है, कई तरह की बातें कही जाती हैं लेकिन मूल सवाल यही है कि एक व्यक्ति या समुदाय ऐसी परिस्थितियों में क्यों पहुंचता है कि वह अपना धर्म बदलने पर विचार करे, इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है.”
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ओपी/वीसी