
Mumbai , 6 जुलाई . Maharashtra राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) ने Monday देर रात घोषणा की कि Mumbai -पुणे एक्सप्रेसवे पर स्थित पुणे-Mumbai मिसिंग लिंक रोड पर यातायात फिर से शुरू कर दिया गया है. व्यापक सुरक्षा कार्यों के पूरा होने के बाद वाहनों की आवाजाही बहाल कर दी गई है.
Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने social media मंच एक्स पर लिखा, “कनेक्टिंग लिंक पर यातायात फिर से शुरू हो गया है. वाहनों की आवाजाही बहाल कर दी गई है. Government अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है. सभी लोग सुरक्षित रहें.”
एमएसआरडीसी के अनुसार, भारी बारिश, तेज हवाओं और कम दृश्यता जैसी प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के बावजूद उसकी टीमों ने लगातार काम कर मार्ग को सुरक्षित रूप से फिर से चालू किया. प्रभावित हिस्से से मलबा हटाने के लिए कई कदम उठाए गए. लगातार बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद Monday सुबह मिसिंग लिंक रोड को बंद कर दिया गया था.
एमएसआरडीसी ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि विशेष उपकरणों की मदद से सड़क को पूरी तरह साफ किया गया. इसके साथ ही तकनीकी विशेषज्ञों ने टनल-2 और उससे सटी पहाड़ी ढलान का विस्तृत निरीक्षण किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां कोई ढीला मलबा या पत्थर यात्रियों के लिए खतरा न बने.
निगम ने बताया कि ड्रोन सर्वेक्षण की भी कोशिश की गई, लेकिन घने कोहरे, भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण हवाई सर्वेक्षण सीमित रहा.
एमएसआरडीसी ने कहा कि सभी आवश्यक सुरक्षा और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही यातायात बहाल किया गया है. यात्रियों से अपील की गई है कि मानसून के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा जारी यातायात सलाह का पालन करें. निगम ने सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
इससे पहले एमएसआरडीसी ने इस घटना को प्राकृतिक आपदा बताते हुए इसे एक्ट ऑफ गॉड करार दिया था. निगम के एक अधिकारी ने निर्माण एजेंसी का बचाव करते हुए कहा था कि इसमें ठेकेदार की कोई गलती नहीं है और यह पूरी तरह प्राकृतिक कारणों से हुई घटना है.
एमएसआरडीसी ने स्पष्ट किया कि भूस्खलन रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय और डिजाइन लागू किए गए थे, लेकिन उनकी भी कुछ सीमाएं होती हैं. एक अधिकारी ने बताया कि स्थल पर आईआईटी बॉम्बे से प्रमाणित रॉकफॉल रोकथाम प्रणाली लगाई गई थी.
इसके तहत सुरंग के ऊपर पहाड़ी ढलान पर 15 मीटर तक की ऊंचाई पर रॉक बोल्टिंग और लोहे की जाली लगाई गई थी, जो अब भी सुरक्षित है. हालांकि, जो विशाल चट्टानें नीचे गिरीं, वे जमीन से करीब 150 मीटर ऊंचाई से आई थीं.
अधिकारी ने कहा कि इस तरह की अत्यधिक और मूसलाधार बारिश के दौरान ऐसी आपदा को रोक पाना बेहद कठिन हो जाता है.
उन्होंने बताया कि बारिश कम होने के बाद विशेषज्ञ चट्टानों का निरीक्षण करेंगे और यह मूल्यांकन करेंगे कि जाली को पहाड़ी पर और ऊपर तक बढ़ाया जा सकता है या नहीं. हालांकि, यह एक महंगी प्रक्रिया होगी और इसके लिए वन विभाग की जमीन का उपयोग करना पड़ सकता है.
उल्लेखनीय है कि यह भूस्खलन Monday , 6 जुलाई को तड़के करीब 3:30 बजे हुआ था. एमएसआरडीसी के अनुसार, मलबा पुणे से Mumbai की ओर जाने वाले मिसिंग लिंक कॉरिडोर की पहली सुरंग के निकास द्वार पर आ गिरा था. इसके कारण सुरक्षात्मक रिटेनिंग वॉल क्षतिग्रस्त हो गई और यह हिस्सा यातायात के लिए असुरक्षित हो गया था.
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एएमटी/डीकेपी