पीटी उषा: 9 साल की उम्र में स्कूल चैंपियन को हराया, एशियाई खेलों में जीते 11 पदक, ‘उड़न परी’ पड़ा नाम

New Delhi, 26 जून . पीटी उषा ने ट्रैक और फील्ड खेल की दुनिया में अपनी काबिलियत के बूते वो मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना हर एथलीट करता है. महिलाओं के बीच इस खेल को लोकप्रिय बनाने में पीटी उषा का अहम योगदान रहा. 9 साल की उम्र में स्कूल चैंपियन को हराकर शुरु हुआ सफर कई बड़ी उपलब्धियों तक पहुंचा.

पीटी उषा का जन्म 27 जून, 1964 को केरल के कोझिकोड जिले के पय्योली गांव में हुआ. उषा का बचपन गरीबी में बिता और एक समय पर उनके पास जूते खरीदने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे. पीटी उषा को दौड़ने का शौक स्कूली दिनों से ही था. 9 साल की उम्र में उषा की काबिलियत को पहली बार पहचान मिली. स्कूल में हुई प्रतियोगिता में उषा ने हर किसी को चौंकाते हुए अपने से तीन साल बड़े स्कूल चैंपियन को हरा दिया.

उषा ने स्कूल में अपनी पढ़ाई के दौरान ही जिला स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू कर दिया. उषा जहां जाती वहां अपनी दौड़ने की क्षमता के कारण चर्चा का विषय बन जातीं. उषा की प्रतिभा को देखते हुए केरल Government ने उन्हें 250 रुपये की छात्रवृति से भी सम्मानित किया. उस दौर और गरीबी में बचपन बिताने वाली उषा के लिए वो 250 रुपये बेहद कीमती थे. इसके बाद ट्रेनिंग और पढ़ाई जारी रखने के लिए उषा ने विशेष स्कूल में अपना दाखिला करवाया.

1976 में नेशनल स्कूल गेम्स में दमदार प्रदर्शन कर उषा कोच ओएम नाम्बियार की निगाहों में आईं और उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. साल 1980 में पीटी उषा के इंटरनेशनल करियर की शुरुआत हुई. कराची में आयोजित हुए Pakistan ओपन नेशनल मीट में उषा ने शानदार प्रदर्शन किया और कुल 4 स्वर्ण पदक जीते.

पीटी उषा इसके बाद 1980, 1984 और 1988 के ओलंपिक में शामिल हुईं. हालांकि, वह देश के लिए पदक लाने से मामूली अंतर से चूक गईं. 1984 में लॉस एंजिल्स में हुए ओलंपिक में उषा ने फाइनल तक का सफर तय किया और वो यह मुकाम हासिल करने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं. उषा का सबसे शानदार प्रदर्शन एशियाई खेलों में आया. उन्होंने एशियाई खेलों में देश के लिए कुल 11 पदक जीते, जिसमें 4 स्वर्ण शामिल रहे. इसके साथ ही एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने कुल 23 पदक अपने नाम किए.

महज 20 साल की उम्र में पीटी उषा को Government द्वारा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वहीं, 1985 में उन्हें पद्म श्री से नवाजा गया. उषा को उनकी उपलब्धियों के लिए फैंस ने कई नाम दिए. उन्हें ‘पायोली एक्सप्रेस’, ‘India की उड़न परी’ और ‘गोल्डन गर्ल’, ‘क्वीन ऑफ ट्रैक एंड फील्ड’ के नाम से भी जाना जाता है. पीटी उषा को साल 2022 में भारतीय ओलंपिक संघ का अध्यक्ष चुना गया और वह अब तक इस पद पर बनी हुई हैं.

–

एसएम/पीएम

Leave a Comment