विकसित भारत जी राम जी बिल पर बोलीं प्रियंका गांधी, केंद्र की नाम बदलने की सनक समझ से बाहर

New Delhi, 16 दिसंबर . महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी करने के बिल पर संसद में जोरदार बहस शुरू हो गई है. बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध किया.

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने Lok Sabha में Government पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस विधेयक से ग्रामीणों को मिलने वाला रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर किया जा रहा है. संविधान की मूल भावना यही है कि शक्ति आम लोगों के हाथ में हो. यही भावना पंचायती राज व्यवस्था की भी है, जहां गांव खुद अपने फैसले लेते हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि नया विधेयक इस मूल भावना के खिलाफ है और सत्ता को केंद्र में समेटने की कोशिश करता है. Government बिना जरूरत केवल नाम बदलने में भारी खर्च कर रही है, जबकि इससे स्थानीय शासन कमजोर हो रहा है. प्रियंका गांधी ने कहा कि मनरेगा पहले से ही एक प्रभावी और गारंटी वाला कानून था, जिसे बदलने की कोई जरूरत नहीं थी.

उन्होंने वित्तीय पहलू पर भी गंभीर सवाल उठाए. प्रियंका गांधी ने बताया कि पहले मनरेगा के तहत कुल फंड का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र Government से आता था, लेकिन नए विधेयक में इसे घटाकर केवल 60 प्रतिशत कर दिया गया है. इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और उनकी पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि Government की ये नाम बदलने की सनक समझ से बाहर है.

प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिए केंद्र Government का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है, जबकि उसकी जिम्मेदारी कम की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि Government ने रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने की बात तो कही है, लेकिन मजदूरी बढ़ाने को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है.

कांग्रेस सांसद ने Government से इस विधेयक को वापस लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि Government को इस बिल को वापस लेकर एक नया और बेहतर विधेयक लाना चाहिए, जो ग्रामीणों के अधिकारों को मजबूत करे, न कि उन्हें कमजोर.

वीकेयू/वीसी

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