
New Delhi, 16 मार्च . दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि हम ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की बात करते हैं लेकिन इसके बावजूद केरल में मतदान और परिणाम की तारीखों के बीच करीब 1 महीने का अंतर है.
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जब देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है, तो यह भी जरूरी है कि लंबी चुनाव प्रक्रिया को कम करने पर गंभीरता से विचार किया जाए. उनके मुताबिक कई बार चुनाव कई चरणों में इतने लंबे समय तक चलते हैं कि Government बनने में भी काफी देरी हो जाती है.
उन्होंने कहा कि केरल में 9 अप्रैल को मतदान होगा, लेकिन उसके नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे. उनके अनुसार इतनी लंबी अवधि यह दिखाती है कि कहीं न कहीं चुनावी प्रक्रिया की योजना में कमी है. अगर चुनाव को बेहतर तरीके से प्लान किया जाए तो वोटिंग और नतीजों के बीच इतना लंबा अंतर नहीं होना चाहिए.
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि उनको बड़ी उम्मीद है कि चुनाव आयोग देश में पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराएगा. उन्होंने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि किसी भी मतदाता को उसके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न किया जाए. हर नागरिक का वोट देने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार की रक्षा करे.
उन्होंने आगे कहा कि 5 राज्यों में चुनाव की घोषणा हुई है, जिनमें एक केंद्रशासित प्रदेश और चार राज्य शामिल हैं, लेकिन जिस तरह से विशेष आदेश सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए जारी किए जा रहे हैं. उससे कई सवाल खड़े होते हैं. उनके मुताबिक ऐसा लगता है कि यह कदम किसी खास Political स्थिति को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है.
प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सत्तारूढ़ दल भाजपा के एजेंडे के अनुसार चुनाव आयोग काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि चाहे जो भी कहा जाए या किया जाए, सच्चाई यह है कि ममता बनर्जी की Government एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी.
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पीआईएम/वीसी