केंद्रीय बजट के बाद वेबिनार में प्रधानमंत्री का संबोधन; टेक्नोलॉजी, सुधार और वित्त पर दिया जोर

New Delhi, 27 फरवरी . Prime Minister Narendra Modi ने Friday को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से “विकसित India के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त” विषय पर आयोजित बजट के बाद के वेबिनार को संबोधित किया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बजट के बाद वेबिनार आयोजित करने की एक मजबूत परंपरा बनी है और यह परंपरा बजट को प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

Prime Minister मोदी ने कहा कि अक्सर बजट का आकलन अलग-अलग मानकों पर किया जाता है – कभी शेयर बाजार की चाल के आधार पर, तो कभी आयकर प्रस्तावों के संदर्भ में. लेकिन सच्चाई यह है कि राष्ट्रीय बजट कोई शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग डॉक्यूमेंट नहीं होता, बल्कि यह एक व्यापक नीति रोडमैप होता है. इसलिए इसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन ठोस और दीर्घकालिक मानकों पर किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वे नीतियां जो इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करें, क्रेडिट को आसान बनाएं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा दें, शासन में पारदर्शिता लाएं और लोगों के जीवन को सरल बनाएं, वही अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती देती हैं.

Prime Minister ने स्पष्ट किया कि किसी भी बजट को अलग-थलग नहीं देखा जाना चाहिए. राष्ट्र निर्माण एक निरंतर प्रक्रिया है और हर बजट उस बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने का एक चरण है, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का संकल्प है. उन्होंने कहा कि हर सुधार, हर आवंटन और हर बदलाव को इसी लंबी यात्रा के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए. यही कारण है कि बजट के बाद आयोजित होने वाले ये वेबिनार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.

उन्होंने अपेक्षा जताई कि वेबिनार केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित न रहें, बल्कि एक प्रभावी ब्रेनस्टॉर्मिंग अभ्यास बनें. उद्योग, अकादमिक जगत, विश्लेषकों और नीति निर्माताओं के सामूहिक विचार-विमर्श से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होता है और परिणाम अधिक सटीक मिलते हैं.

Prime Minister ने कहा, “21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और India की विकास यात्रा एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. पिछले एक दशक में India ने असाधारण लचीलापन (रेजिलिएंस) दिखाया है और यह संयोग नहीं, बल्कि सुधारों की देन है. Government ने प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार किया है, टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस को बढ़ावा दिया है और संस्थाओं को मजबूत किया है.”

उन्होंने कहा कि देश आज भी ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार है. इस गति को बनाए रखने के लिए केवल नीतिगत मंशा ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट क्रियान्वयन (डिलीवरी एक्सीलेंस) पर भी ध्यान देना होगा. सुधारों का मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी प्रभाव से किया जाना चाहिए. उन्होंने एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स के व्यापक उपयोग से पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ाने की बात कही. साथ ही शिकायत निवारण प्रणाली के जरिए निरंतर निगरानी पर भी जोर दिया.

Prime Minister ने कहा कि पिछले एक दशक में Government ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया है. India का विकास हाईवे, रेलवे, बंदरगाह, डिजिटल नेटवर्क और पावर सिस्टम जैसे ठोस परिसंपत्तियों के निर्माण से ही संभव है. उन्होंने बताया कि 11 वर्ष पहले सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के लिए बजट में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान था, जो मौजूदा बजट में बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है.

उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर Governmentी निवेश निजी क्षेत्र के लिए स्पष्ट संदेश है. अब समय है कि उद्योग और वित्तीय संस्थान भी नई ऊर्जा के साथ आगे आएं. इंफ्रास्ट्रक्चर में अधिक भागीदारी, फाइनेंसिंग मॉडल में नवाचार और उभरते क्षेत्रों में मजबूत सहयोग की आवश्यकता है. उन्होंने परियोजना स्वीकृति प्रक्रिया और मूल्यांकन प्रणाली को मजबूत करने, लागत-लाभ विश्लेषण और लाइफ साइकल कॉस्टिंग को प्राथमिकता देने पर जोर दिया ताकि देरी और अपव्यय को रोका जा सके.

Prime Minister ने आगे कहा कि Government विदेशी निवेश ढांचे को और सरल और निवेशक अनुकूल बना रही है. सिस्टम को अधिक पूर्वानुमान योग्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. दीर्घकालिक वित्त को मजबूत करने के लिए बॉन्ड बाजार को अधिक सक्रिय बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं और बॉन्ड की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि बॉन्ड मार्केट सुधारों को दीर्घकालिक विकास के सक्षम साधन के रूप में देखा जाना चाहिए. इसके लिए पूर्वानुमान की स्पष्टता, पर्याप्त तरलता, नए वित्तीय उपकरण और जोखिम प्रबंधन आवश्यक हैं. उन्होंने उद्योग जगत और विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख लेकर ठोस सुझाव दें.

Prime Minister मोदी ने आगे कहा कि Government, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ तैयार किया जाना चाहिए. यह साझा संकल्प विकसित India की यात्रा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन सकता है. उन्होंने कहा कि किसी भी नीति की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है और इसमें सभी हितधारकों की भूमिका अहम है.

अपने संबोधन के अंत में Prime Minister ने सभी हितधारकों (वित्तीय संस्थानों, बाजार, उद्योग, पेशेवरों और नवाचारकर्ताओं) से अपील की कि वे बजट में दिए गए नए अवसरों का पूरा लाभ उठाएं. उन्होंने कहा कि अब बजट पर चर्चा का समय नहीं है, बल्कि उसे जमीन पर तेजी से और सरल तरीके से लागू करने का समय है. सभी की भागीदारी और सहयोग से ही यह संभव है कि घोषणाएं वास्तविक उपलब्धियों में बदलें और ‘विकसित भारत’ का सपना जल्द साकार हो.

डीबीपी/

Leave a Comment