प्रधानमंत्री मोदी-राष्ट्रपति ली की वार्ता में भारत-कोरिया आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर जोर

New Delhi, 20 अप्रैल . दक्षिण कोरिया के President ली जे म्यूंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता में Narendra Modi ने भारत-कोरिया आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा.

Prime Minister Narendra Modi ने सोशल मीड‍िया एक्‍स अकाउंट में जानकारी साझा करते हुए ल‍िखा, ”भारत-कोरिया व्यापारिक नेताओं के संवाद ने विभिन्न क्षेत्रों में हमारी आर्थिक साझेदारी की अपार संभावनाओं को उजागर किया. हमारा सहयोग दोनों देशों में विकास और समृद्धि को गति प्रदान कर सकता है.”

पीएम ने पोस्‍ट में आगे ल‍िखा, ”हमारा मुख्य ध्यान आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने, भविष्य के लिए तैयार क्षेत्रों को समर्थन देने और हमारे युवाओं के लिए अवसर सृजित करने पर केंद्रित है.”

इस दौरान President ली ने Prime Minister Narendra Modi के साथ मिलकर दिल्ली में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत, उत्तर प्रदेश के राजकीय वृक्ष सीता अशोक का पौधा रोपित किया.

India की राजकीय यात्रा के अवसर पर India के Prime Minister Narendra Modi और कोरिया गणराज्य के President ली जे-म्युंग के बीच हुई बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने जहाज निर्माण, शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में साझेदारी के लिए अपनी Governmentी एजेंसियों और निजी संस्थाओं के बीच आपसी लाभकारी सहयोग पर सार्थक और गहन विचार-विमर्श किया.

India और दक्षिण कोरिया दोनों ही समृद्ध समुद्री परंपराओं वाले राष्ट्र हैं, और समुद्री उद्योगों के क्षेत्र में उनके व्यापक साझा हित और पूरक ताकतें हैं. India की तीव्र आर्थिक वृद्धि और उसकी अर्थव्यवस्था के अंतरराष्ट्रीयकरण के साथ, समुद्री क्षेत्र India की सुरक्षा और समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

दोनों पक्षों ने माना कि ‘मैरीटाइम अमृत काल 2047 विजन’ के तहत India की समुद्री योजनाओं ने दक्षिण कोरिया जैसे दोस्त देश के साथ लंबे समय तक सहयोग के कई नए मौके पैदा किए हैं. दक्षिण कोरिया जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र में काफी आगे है, इसलिए दोनों देश मिलकर शिपबिल्डिंग, बंदरगाह विकास और समुद्री लॉजिस्टिक्स में काम कर सकते हैं. इससे न सिर्फ आर्थिक फायदा होगा, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच समझ और साझेदारी भी और मजबूत होगी.

भारतीय पक्ष ने कोरिया को बताया कि India में बड़े स्तर पर नए (ग्रीनफील्ड) शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने के अच्छे मौके हैं. इसके लिए Government की ‘जहाज निर्माण विकास योजना’ और राज्य Governmentों व भारतीय वित्तीय संस्थानों की तरफ से कई तरह की सुविधाएं और प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं.

India ने कोरिया की बड़ी शिपबिल्डिंग कंपनियों को इन प्रोजेक्ट्स में टेक्निकल और स्ट्रैटेजिक पार्टनर के तौर पर शामिल होने का न्योता दिया, ताकि डिजाइन, उत्पादन, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, क्वालिटी और सेफ्टी जैसे क्षेत्रों में उनका अनुभव काम आ सके. इस पर कोरियाई पक्ष ने उम्मीद जताई कि बिजनेस सेक्टर की भागीदारी से यह सहयोग और आगे बढ़ेगा.

एवाई/डीकेपी

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