
तिरुमाला, 28 दिसंबर . तिरुपति बालाजी मंदिर में तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने वैकुंठ एकादशी उत्सव की तैयारी तेज कर दी है.
मंदिर प्रशासन ने भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दर्शन को दो चरणों में बांटा है और पिछले साल की तरह इस साल भी दर्शन के लिए टोकन लेना अनिवार्य होगा. टोकन की व्यवस्था मंदिर प्रशासन की तरफ से ऑनलाइन की गई है.
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के कार्यकारी अधिकारी अनिल कुमार सिंघल ने समाचार एजेंसी से वैकुंठ एकादशी उत्सव की तैयारी पर बात करते हुए कहा, “30 दिसंबर से 8 जनवरी तक चलने वाले 10 दिवसीय वैकुंठ एकादशी उत्सव के लिए सभी व्यवस्थाएं पिछले वर्ष के श्रद्धालुओं के अनुभव के आधार पर कर ली गई हैं. टीटीडी बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण उत्सव के दौरान दर्शन व्यवस्था की दो अलग-अलग प्रणालियों की शुरुआत करना है.
उन्होंने बताया कि पहले तीन दिन यानी 30 दिसंबर, 31 दिसंबर और 1 जनवरी को ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था शुरू की है, जिसमें टोकन अप्लाई करने के लिए पांच दिन का समय दिया जाएगा और इस प्रणाली के तहत 1.89 लाख श्रद्धालुओं को एक समय सीमा के साथ दर्शन करने का मौका मिलेगा और 2 जनवरी के बाद दूसरे चरण में भी टोकन की व्यवस्था रहेगी. उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील भी की है कि टोकन की समय-सारणी के साथ मंदिर में दर्शन के लिए आएं, जिससे भीड़ को व्यवस्थित किया जा सके.
उन्होंने आगे बताया कि जिन श्रद्धालुओं को शुरुआत के तीन दिन में टोकन नहीं मिल पाया है, वे और बाकी सभी श्रद्धालु 2 जनवरी से लेकर 8 जनवरी तक भगवान विष्णु के दर्शन कर सकते हैं.
तिरुपति में वैकुंठ एकादशी एक विशाल और आध्यात्मिक उत्सव है. 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त पापों से मुक्ति पाने और मंदिर में मौजूद वैकुंठ द्वार के दर्शन के लिए आते हैं. ऐसा माना जाता है कि इससे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है. इस उत्सव में विशेष दर्शन होते हैं और भक्त “गोविंदा… गोविंदा” का जाप करते हैं. मंदिर को भव्य तरीके से फूलों से सजाया जाता है और भगवान वेंकटेश्वर अद्भुत रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं.
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पीएस/डीकेपी