लाल गमछा-हरा गमछा देखकर वोट देने का नतीजा भुगत रही बिहार की जनता: प्रशांत किशोर

गोपालगंज, 5 जून . जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की जनता ने विकास, शिक्षा और रोजगार के बजाय जाति-धर्म और प्रतीकों के आधार पर वोट दिया, जिसका खामियाजा आज भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने परिवारवाद, पलायन और बदहाल शिक्षा व्यवस्था के लिए Government के साथ-साथ मतदाताओं को भी जिम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा, “मुजफ्फरपुर हादसे के बाद स्वास्थ्य मंत्री होते हुए निशांत कुमार दिल्ली रवाना हो गए और उसके बाद Friday पहुंचे हैं. इसमें नई बात नहीं है. बिहार ने उसी मुजफ्फरपुर में एक बहुत बड़ा कांड देखा है, जब Chief Minister नीतीश कुमार थे. क्या नीतीश कुमार ने उस पर कोई बयान दिया था? चुनाव के बाद 55 से ज्यादा बिहार के नवयुवक, दूसरे राज्यों में मजदूरी करते हुए दुर्घटनाग्रस्त हो गए, उनकी जान चली गई. क्या तब किसी ने उस पर बयान दिया? यहां पर सैकड़ों पुल रोज टूट रहे हैं, उस पर आपने Government का कोई बयान सुना? Government का बयान तो लाल गमछे और हरे गमछे पर है. Government का बयान तो जाति-धर्म पर है.”

प्रशांत किशोर ने कहा, “Government का बयान जनता के मुद्दों पर नहीं है और इसके लिए Government और Government में बैठे हुए लोगों से ज्यादा आप और हम जिम्मेदार हैं, क्योंकि हम लोगों ने अपने बच्चों के मुद्दों के लिए वोट नहीं किया है. हम लोगों ने लाल गमछा और हरा गमछा देख कर वोट किए. 10,000 रुपए में अपने बच्चों का भविष्य बेचा है, तो भैया आपको भुगतना ही पड़ेगा. तीन बरस से जन सुराज यही तो बता रहा था कि नेताओं का चेहरा देख कर वोट दीजिएगा, तो नेता का लड़का चाहे पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, स्वस्थ हो या अस्वस्थ, वो नेता का लड़का नेता बनेगा, राजा बनेगा और आपके बच्चे मजदूर बनेंगे.”

उन्होंने कहा, “बिहार में शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी. हम कैमरे पर कह रहे हैं, दावे के साथ कह रहे हैं कि यहां पर फैक्ट्री नहीं खुलेगी, रोजगार लोगों को नहीं मिलेगा, यहां से पलायन बंद नहीं होगा. बात सम्राट चौधरी की नहीं है, बात इसकी है कि बिहार के लोगों ने वोट किस बात के लिए दिया है. आपने वोट अरवा-उसना चावल के लिए दिया है, तो चावल खाइए और जाति-धर्म में बंटे रहिए.”

प्रशांत किशोर ने कहा, “नीतीश कुमार पूरे जीवन भर परिवारवाद पर भाषण देते रहे और आज उनका लड़का स्वास्थ्य मंत्री है, उपेंद्र कुशवाहा का लड़का पंचायत राज मंत्री है, लालू यादव का तो आधा खानदान Government में है, जीतन राम मांझी का पूरा खानदान Government में है. इसके लिए ये नेता दोषी नहीं हैं, इसके लिए जनता दोषी है, क्योंकि आप और हम ये जानते हैं कि इनको वोट देंगे, इनको समाज से या आपके बच्चों से मतलब नहीं है. अपने बच्चों से, अपने परिवार की चिंता है. फिर भी आप जब वोट दिए हैं, तो आपको भुगतना तो पड़ेगा.”

उन्होंने कहा, “लोभी के गांव में ठग भूखा नहीं मर सकता है. जब तक बिहार के लोग लोभ नहीं छोड़ेंगे, त्वरित लाभ का लोभ नहीं छोड़ेंगे, तब तक ठग नेता आपका शोषण, आपके बच्चों का शोषण करते रहेंगे. अगर ऐसे लोगों को फिर से नेता बनाया जा रहा है, तो इससे प्रशांत किशोर की जिंदगी पर असर नहीं पड़ेगा, बल्कि बिहार के बच्चों की जिंदगी पर असर पड़ेगा. पूरे देश में लोग हंस रहे हैं कि बिहार में ऐसे Chief Minister हैं जिन्हें विषयों, भाषा और व्याकरण की कोई जानकारी नहीं है. बाकी सब तो छोड़िए, इस व्यक्ति को राष्ट्रपिता का नाम तक नहीं पता.”

पीआईएम/एबीएम

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