
कोलकाता, 30 जुलाई . दुर्गा पूजा त्योहार से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई संगठन में फिर से बदलाव कर सकती है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर में इन बदलावों के तहत जिला, मंडल और बूथ स्तर पर फेरबदल की उम्मीद है.
सूत्रों ने बताया कि इस कवायद का मुख्य मकसद पार्टी के जमीनी ढांचे को मजबूत करना होगा. राज्य समिति में भी कुछ बदलाव हो सकते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि हाल ही में राज्य कैबिनेट में शामिल हुए कई भाजपा विधायकों को पार्टी की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति के तहत संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जा सकता है. हालांकि यह नियम संगठनात्मक पदों पर काबिज सभी मंत्रियों पर एक समान रूप से लागू नहीं हो सकता है.
उनके मुताबिक, यह नया फेरबदल मुख्य रूप से संगठनात्मक जिलों, मंडलों (ब्लॉकों) और बूथों के तीन स्तरों पर होगा.
पार्टी की राज्य समिति के एक सदस्य ने कहा, “हालांकि, मौजूदा राज्य समिति में भी कुछ बदलावों की संभावना है. पार्टी की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की सामान्य नीति के तहत नई राज्य कैबिनेट में जगह पाने वाले कुछ विधायकों को संगठनात्मक कर्तव्यों से मुक्त किया जा सकता है. हालांकि यह उन सभी राज्य मंत्रियों पर लागू नहीं होगा जो राज्य के नेताओं के तौर पर भी पद संभाले हुए हैं.”
पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया कि जिन नेताओं के खिलाफ पिछले दो महीनों में राज्य स्तर पर शिकायतें दर्ज की गई हैं (खासकर इस साल की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद) उन्हें उनके मौजूदा पदों से हटाया जा सकता है. इस कदम का मकसद संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना और अहम पदों से विवादित लोगों को हटाना है.
माना जा रहा है कि राज्य नेतृत्व भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में अहम पदों के लिए पश्चिम बंगाल के दो नेताओं की सिफारिशों पर भी विचार कर रहा है, जिनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव के पद शामिल हैं.
राज्य भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा पंचायत मामलों और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष पहले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि राज्यसभा सांसद राहुल सिन्हा पहले राष्ट्रीय सचिव का पद संभाल चुके हैं. दोनों नेता राज्य भाजपा अध्यक्ष के तौर पर भी काम कर चुके हैं.
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, राज्य में Government बदलने के बाद से ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे तृणमूल कांग्रेस के कई जमीनी स्तर के नेता भाजपा में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि खबर है कि राज्य नेतृत्व ने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे ‘अवांछित तत्वों’ को अंदर न आने दें.
राज्य समिति के एक सदस्य ने कहा, “संगठन में फेरबदल का मकसद जमीनी स्तर पर लंबे समय से पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं को शामिल करना भी है, जो ऐसे तत्वों को अंदर आने से प्रभावी ढंग से रोक सकें.”
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