
New Delhi, 10 फरवरी . बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने जा रहा है. चुनावी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. वोटिंग को लेकर कई सख्त नियमों का ऐलान किया गया है. बांग्लादेश में चुनाव में जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के बीच टक्कर देखने को मिल सकती है. इस बीच शिक्षक अरविंद गुप्ता ने कहा कि ये चुनाव सबको साथ लेकर चलने वाला नहीं है. वहीं, उन्होंने ‘सीड्स ऑफ हेट : बांग्लादेश एक्सट्रीमिस्ट सर्ज’ नाम की किताब पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी.
शिक्षक अरविंद गुप्ता ने कहा, “बांग्लादेश अब एक चौराहे पर है. ये बहुत जरूरी चुनाव होने वाले हैं. आवामी लीग चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही है, इसलिए ये चुनाव पक्का सबको साथ लेकर चलने वाला नहीं है, इसलिए ये बांग्लादेश की राजनीति को एक अलग दिशा में बदलने वाला है. शेख हसीना के 15 साल के दौरान की राजनीति और अब बांग्लादेश में जो होने वाला है, वो बहुत अलग है. पिछले दो सालों में अंतरिम Government के शासन के दौरान बांग्लादेश में Pakistan की वापसी हुई है. Political माहौल बहुत तेजी से बदलने वाला है. हमें इस पर नजर रखनी है और सावधान भी रहना है, क्योंकि इन Political दलों का पिछला रिकॉर्ड हमारे लिए अच्छा नहीं रहा है.”
‘सीड्स ऑफ हेट : बांग्लादेश एक्सट्रीमिस्ट सर्ज’ (नफरत के बीज : बांग्लादेश में चरमपंथियों का उभार) नाम की किताब पर चर्चा को लेकर अरविंद गुप्ता ने कहा, “यह बुक फैक्ट्स पर आधारित है. यह बांग्लादेश के छह खास इस्लामिक संगठनों को देखती है, जिनमें सबसे खास जमात-ए-इस्लामी है, लेकिन इसमें हिफाजत-ए-इस्लाम, खिलाफत मजलिस, इस्लामी आंदोलन, हिज्ब-ए-तहरीर और हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी-बांग्लादेश भी शामिल हैं. यह हमें उनकी आइडियोलॉजी, उनके लीडर्स, उनकी गतिविधि, उनका कनेक्शन वगैरह के बारे में बैकग्राउंड जानकारी देती है.”
राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने किताब को लेकर कहा, “हमारे यहां ऐसे समुदाय हैं, जो बॉर्डर के दोनों तरफ एक जैसे हैं, इसलिए भाषा, सांस्कृतिक और दूसरे संबंध जरूरी हैं. बेशक, आप जानते हैं, जो कुछ भी होता है, उसके अच्छे और बुरे, दोनों असर से हमें निPatna होगा. हमारा पूरा पूर्वी इलाका, कुछ मायनों में, वहां होने वाले विकास के लिए कमजोर हो सकता है, जैसा कि हमने पहले भी देखा है.”
उन्होंने कहा, “हम अपने सबसे अच्छे हितों को सुरक्षित करने के लिए सभी Political समूहों के साथ काम करते हैं, जो असल में अपने पड़ोसियों के साथ शांति और तालमेल से रहना है. हमारे पास कुछ रेड लाइन्स हैं और मुझे लगता है कि वे रेड लाइन्स सबको पता हैं. जो संगठन India के साथ अच्छे संबंध रखना चाहते हैं, वे उन रेड लाइन्स के अंदर रहने को तैयार हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि दूसरे शब्दों में, वे ऐसी नीति नहीं अपनाते जो India विरोधी हो, जिससे हमें सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से किसी तरह से नुकसान हो या देश के अंदर हमारे लिए जरूरी हितों को नुकसान हो. हमेशा एक ऐसा माध्यम खोजने की गुंजाइश होती है, जिससे दोनों को फायदा हो. मुझे लगता है कि यह बहुत साफ है कि हम किसी व्यक्ति के लिए नहीं खड़े हैं. हम बड़े हितों के लिए खड़े हैं, जो हमें अपने पड़ोस में सभी संगठनों या समूहों के साथ इस तरह से काम करने में मदद कर सकें, जो हमारे हितों के लिए सबसे अच्छा हो और साथ ही हमारे पड़ोस में हमारे आसपास के लोगों के हितों के लिए नुकसानदायक न हो.
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केके/एबीएम