प्रो. गोबर्धन दास की विशेषज्ञता से मजबूत होगी नीति निर्माण प्रक्रिया: पीएम मोदी

New Delhi, 27 अप्रैल . Prime Minister Narendra Modi ने Monday सुबह नीति आयोग के नए पूर्णकालिक सदस्य प्रो. गोबर्धन दास से मुलाकात की. पीएम मोदी ने उनकी जीवन यात्रा को प्रेरणादायक बताया और सार्वजनिक स्वास्थ्य व इम्यूनोलॉजी में उनके योगदान की सराहना की. उन्होंने कहा कि प्रो. दास की विशेषज्ञता से नीति निर्माण की प्रक्रिया और मजबूत होगी और देश को नई दिशा मिलेगी.

इस मुलाकात की तस्वीर शेयर करते हुए पीएम मोदी ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज सुबह प्रो. गोबर्धन दास जी से मुलाकात हुई. उनका निजी जीवन सफर बेहद प्रेरणादायक है. उन्होंने जिन भी संघर्षों का सामना किया, उनसे समाज की सेवा करने और उसे कष्टों से मुक्त करने का उनका संकल्प और भी मजबूत हुआ. यह बात सार्वजनिक स्वास्थ्य और इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र में उनके योगदान में साफ झलकती है. उनका समृद्ध कार्य और विद्वत्ता हमारी नीति-निर्माण की रूपरेखा को और भी समृद्ध बनाएगी.”

नीति आयोग के नए सदस्य बनने के बाद प्रो. गोबर्धन दास ने 25 अप्रैल को एक इंटरव्यू में देश के विकास और क्षेत्रीय पुनर्जीवन को लेकर अपना विस्तृत रोडमैप साझा किया था. उन्होंने साफ कहा था कि उनका लक्ष्य सिर्फ एक पद संभालना नहीं है, बल्कि India को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के विजन को आगे बढ़ाना है, जैसा कि Prime Minister Narendra Modi ने रखा है.

प्रो. दास ने इस जिम्मेदारी के लिए Prime Minister का आभार जताते हुए कहा कि यह सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि पूरे बंगाली समुदाय के लिए गर्व की बात है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ देश के विकास में योगदान देंगे.

अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य महान विचारकों और विभूतियों की भूमि रहा है. उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, सुभाष चंद्र बोस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और वैज्ञानिक मेघनाद साहा जैसे महान नामों का उल्लेख किया और कहा कि बंगाल को अक्सर ‘सोनार बांग्ला’ कहा जाता है.

उन्होंने यह भी चिंता जताई कि आज के समय में पश्चिम बंगाल में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है, जितनी होनी चाहिए. इसी वजह से कई लोगों को रोजगार और बेहतर सेवाओं के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति बदलने की जरूरत है और नीति आयोग इस अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

प्रो. दास ने आगे कहा कि India को आत्मनिर्भर और वैश्विक शक्ति बनाने के लिए ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना को नीति निर्माण की नींव बनाना जरूरी है. उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे देश ने स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर अपनी वैज्ञानिक क्षमता साबित की.

उन्होंने यह भी कहा कि उनका फोकस सिर्फ आर्थिक विकास पर नहीं, बल्कि समग्र विकास पर रहेगा, जिसमें रोजगार, उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना शामिल है. उनका लक्ष्य है कि विकास का लाभ हर नागरिक तक पहुंचे और कोई भी पीछे न छूटे.

पीआईएम/एएस

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