
Bengaluru, 21 अगस्त . कर्नाटक Government तटीय और मलनाड इलाकों के लिए व्यापक पर्यटन नीति तैयार कर रही है. ऊर्जा और पर्यटन मंत्री केजे जॉर्ज ने Friday को कहा कि इसका ड्राफ्ट 7 सितंबर तक तैयार होने की उम्मीद है.
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाकों के तौर पर देखा जाता है. इस इलाके में पहले भी तनाव और Political व सांप्रदायिक कारणों से बदले की भावना से की गई हत्याओं की घटनाएं देखी गई हैं.
Government इस इलाके में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन चुनौतियों का समाधान भी करना चाहती है, जिन्होंने विकास को प्रभावित किया है.
प्रस्तावित तटीय-मलनाड पर्यटन नीति का मकसद इन दोनों इलाकों की पर्यटन क्षमता का लाभ उठाना है. ये इलाके अपने समुद्र तटों, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों, जंगलों और प्रकृति से जुड़ी खासियतों के लिए जाने जाते हैं. उम्मीद है कि यह नीति नियमों से जुड़ी बाधाओं को दूर करेगी और पर्यटन में निवेश व रोजगार के लिए बेहतर माहौल बनाएगी.
जॉर्ज ने Friday को विधान सौधा में तटीय और मलनाड इलाकों के चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की. बैठक में इन इलाकों में पर्यटन की संभावनाओं, निवेश के मौकों और पर्यटन प्रोजेक्ट्स को अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने में आने वाली दिक्कतों पर चर्चा हुई.
चुने हुए प्रतिनिधियों ने पर्यटन प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग की. विधायक वी. सुनील कुमार ने तटीय इलाके में पर्यटन निवेश को आसान बनाने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम का प्रस्ताव रखा.
उन्होंने कहा कि अलग-अलग विभागों के बीच मंजूरी और तालमेल के लिए एक सुव्यवस्थित सिस्टम निवेश को आकर्षित करने और पर्यटन विकास को तेज करने में मदद करेगा.
मंगलुरु जिले के प्रभारी मंत्री यूटी खादर ने कहा कि तटीय इलाके में पर्यटन की बहुत संभावना है, लेकिन कई प्रोजेक्ट्स को कोस्टल रेगुलेशन जोन (सीआरजेड), इको-सेंसिटिव इलाकों और वन विभाग से जुड़े नियमों के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
उन्होंने नियमों और मंजूरी की प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का सुझाव दिया, साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पर्यावरण से जुड़े सुरक्षा उपायों का पालन हो.
उडुपी जिले के प्रभारी मंत्री रिजवान अरशद ने जिले में होटलों और पर्यटन से जुड़ी दूसरी गतिविधियों के लिए बेहतर माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रस्तावित नीति में पर्यटकों की मांग और पर्यटन गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर खुलने के समय और दूसरी जरूरतों से जुड़े प्रावधानों पर विचार किया जाए.
बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. राम प्रसाद मनोहर, कैप्टन बृजेश छोटा, कोटे श्रीनिवास पुजारी, वी. सुनील कुमार, मंजूनाथ भंडारी, इवान डिसूजा, हरीश पूंजा, उमानाथ ए. कोटियन, भरत शेट्टी वाई., डी. वेदव्यास कामथ, राजेश नाइक यू., भागीरथी मुरुल्या, अशोक कुमार राय, गुरुराज शेट्टी गंतिहोले, ए. किरण कुमार कोडगी, यशपाल सुवर्णा और गुरमे सुरेश शेट्टी समेत अन्य शामिल हुए.
जॉर्ज ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों से मिले सुझावों की जांच की जाएगी और उन्हें ड्राफ्ट पॉलिसी में शामिल किया जाएगा. तटीय और मलनाड क्षेत्र कर्नाटक की पर्यटन संपत्तियों में अहम हैं. इनकी पर्यटन क्षमता का पूरा लाभ उठाने के लिए हमें एक ऐसी व्यापक नीति की जरूरत है जो स्थानीय जरूरतों और चुने हुए प्रतिनिधियों के सुझावों को ध्यान में रखे.
मंत्री ने कहा कि नीति को अंतिम रूप देने से पहले और बातचीत की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित नीति की जांच करने और आगे के फैसले के लिए जल्द ही मंगलुरु में कैबिनेट की बैठक होने की उम्मीद है.
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एएसएच/एबीएम