
New Delhi, 9 अगस्त . विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने केरल के पूर्व Chief Minister पिनाराई विजयन के ‘वंदे मातरम’ पर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि India के स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत की विरासत को आरएस के एजेंडे तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसे Political चश्मे से देखा जाना चाहिए.
विनोद बंसल ने से बात करते हुए कहा, “पिनाराई विजयन कोई आम व्यक्ति नहीं हैं, वह राज्य के पूर्व Chief Minister हैं. उन्हें यह भी पता है कि संसद के दोनों सदनों ने कानून बनाकर ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है. इसके बावजूद, पिनाराई विजयन अपने Political हितों को साधने के लिए केरल के लोगों को ‘वंदे मातरम’ के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और अपना Political उल्लू सीधा कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि विजयन को यह समझना चाहिए कि वंदे मातरम वह गीत है जिसने स्वाधीनता आंदोलन में असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए प्रेरित किया. वीएचपी प्रवक्ता ने कहा, “वंदे मातरम के माध्यम से देश की सीमा पर खड़ा मेरा जवान, जो -40 से -50 डिग्री तापमान में अपनी जान को जोखिम में डालकर देश की सेवा करता है. लाखों सैनिक वंदे मातरम गाकर मां भारती के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर देते हैं. ऐसे वंदे मातरम को नहीं गाने के लिए कहना और Government को प्रेरित करना और वो भी स्वाधीनता दिवस के ठीक पहले यह ठीक नहीं है.”
बंसल ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा, “15 अगस्त 1947 को प्रातः 6.30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर पूरा वंदे मातरम गाया गया था. देश की स्वाधीनता के उत्सव के दौरान भी वंदे मातरम पूरा नहीं गाया गया तो यही कहा जाएगा कि देश की स्वाधीनता के वीर जवानों का अपमान कर रहे हैं. आखिरकार यह सोच कहां से आती है? इसे आरएसएस का एजेंडा कहकर अपमान करना, सभी के सभी वीरों का अपमान है.”
वीएचपी प्रवक्ता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “विजयन को अब इसकी प्रैक्टिस कर लेनी चाहिए. कुछ दिनों के बाद यह गाना उनके लिए अनिवार्य हो जाएगा. अगर दिनों बाद उन्होंने ऐसी कुछ हिमाकत की, तो वह स्वयं अपने लोगों के साथ जेल में होंगे. उन्हें अपने Political एजेंडे को देश के ऊपर नहीं समझना चाहिए.”
उन्होंने आरोप लगाया, “केरल में कुछ Political दल देशभक्ति के प्रतीकों को लेकर भ्रम फैला रहे हैं. वंदे मातरम किसी दल या संगठन का नारा नहीं है. यह 130 करोड़ भारतीयों की भावना है. इसे बांटने की कोशिश देश को कमजोर करने जैसी है.”
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एससीएच/पीएम