पेजेश्कियन बोले, ‘ऐतिहासिक दस्तावेज ताकतवर ईरान का संदेश’

तेहरान, 18 जून . अमेरिका-ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते का ऐतिहासिक दस्तावेज ईरान के President मसूद पेजेश्कियन ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया. इस दस्तावेज को उन्होंने ताकतवर ईरान का संदेश बताया.

उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, “यह एक ऐतिहासिक दस्तावेज है और एक ताकतवर ईरान का संदेश है: शांति आपसी सम्मान की छाया में ही संभव होगी. इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान हमेशा वैश्विक शांति के लिए प्रतिबद्ध रहा है और रहेगा, साथ ही अपनी गरिमा, स्वतंत्रता, प्रगति और क्षेत्रीय सहयोग को भी बनाए रखेगा.”

इसके साथ ही, उन्होंने 2 पन्नों वाला एमओयू भी पोस्ट किया, जिसमें वे बिंदु भी शामिल हैं जो दोनों के बीच शांति का आधार हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने Wednesday रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे. इस दौरान फ्रांस के President इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद थे.

डील पर दस्तखत करने के बाद ट्रंप वर्साय पैलेस से बाहर आए. बाहर खड़े पत्रकार ने जब शांति समझौते का जिक्र किया तो उन्होंने ऊंची आवाज में कहा, ‘डील साइन हो गई है.’ इसके बाद ईरानी President मसूद पेजेश्कियन ने भी ई दस्तखत किए. समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया.

समझौते में होर्मुज से नाकेबंदी हटाना, मिलिट्री एक्शन पर नकेल कसना (लेबनान का भी जिक्र है), संप्रभुता का सम्मान करना, ईरान पर से संयुक्त राष्ट्र और आईएईए आदि संगठनों से प्रतिबंध हटाने जैसी बातें शामिल हैं.

इस बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा है कि अमेरिका के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करता है.

बाघेई ने हिज्बुल्लाह समर्थित लेबनानी समाचार आउटलेट अल अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि “यदि इजरायली इकाई लेबनान पर हमले जारी रखती है, तो यह समझौते में किए गए वादों का उल्लंघन माना जाएगा.”

उन्होंने आरोप लगाया कि “इजरायल क्षेत्र में शांति के लिए किसी भी कूटनीतिक रास्ते को मौका नहीं देना चाहती.”

बाघेई ने यह भी कहा कि अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह संबंधित पक्ष को समझौते के वादों का पालन करने के लिए बाध्य करे. उन्होंने बताया कि इस एमओयू के तहत केवल परमाणु मुद्दे और प्रतिबंध हटाने पर ही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होगी.

बाघेई के अनुसार, “60 दिनों के भीतर परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर वार्ता होगी, और जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया जा सकता है.”

उन्होंने दोहराया कि ईरान का रुख स्पष्ट है: “हमने कभी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं की है, न ही हम इसे बनाकर या खरीदकर हासिल करना चाहते हैं.”

केआर/

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