
New Delhi 7 मार्च . Lok Sabha अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने कहा कि संसदीय प्रणाली में अध्यक्ष का पद बहुत महत्वपूर्ण और लोकतांत्रिक होता है. वे एक प्रधान होते हैं, प्रधानसेवक होते हैं. स्पीकर 140 करोड़ लोगों का प्रतिबिंब हैं. उस प्रतिबिंब को दर्पण में दिखना चाहिए. मैं तो यही कहूंगा कि सोमनाथ दादा ने अपने अनुशासन के लिए अपने दल तक को त्याग दिया था.
पप्पू यादव ने कहा कि आज हमारे अध्यक्ष अच्छे हैं और मेरी कामना है कि उनका प्रतिनिधित्व India की पूरी 140 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व बना रहे और ऐसी आवश्यकता कभी उत्पन्न न हो.
10 फरवरी को विपक्ष के सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ Lok Sabha महासचिव को रूल 94 (सी) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा. इस पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. यह प्रस्ताव Lok Sabha में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने पेश किया था, जिसमें संविधान के आर्टिकल 94(सी) का इस्तेमाल करते हुए स्पीकर को हटाने का प्रावधान है.
नोटिस में विपक्ष ने स्पीकर पर सदन की कार्यवाही खुलेआम पक्षपातपूर्ण तरीके से चलाने और विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं को बार-बार बोलने का मौका न देने का आरोप लगाया. विपक्ष ने कहा था कि हालांकि वह स्पीकर का पर्सनली सम्मान करता है, लेकिन उसे इस बात से दुख और तकलीफ है कि विपक्षी सांसदों को Lok Sabha में लोगों की चिंता के जायज मुद्दे उठाने से लगातार रोका जा रहा है.
विपक्ष ने अपने आरोप को साबित करने के लिए प्रस्ताव में कई उदाहरणों का हवाला दिया था. इसमें कहा गया था कि 2 फरवरी को राहुल गांधी को President के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना संबोधन पूरा नहीं करने दिया गया.
3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को बजट सेशन के बाकी समय के लिए मनमाने ढंग से सस्पेंड कर दिया गया, जिसके बारे में नोटिस में दावा किया गया कि यह सदस्यों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए सजा देने जैसा है. अपने नोटिस में विपक्ष ने कुछ और उदाहरणों का जिक्र किया है.
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एसडी/वीसी