
इस्लामाबाद, 31 दिसंबर . Pakistan स्थित एक महिला मंच ने बलूचिस्तान की महिलाओं की मांगों को जायज बताते हुए उनके हक में आवाज बुलंद की है. महिला संगठन ने जबरन गायब किए गए बलूचों की सुरक्षित वापसी की मांग का समर्थन किया है.
Tuesday को जारी एक बयान में ख्वातीन महाज-ए-अमल (वीमेन एक्शन फोरम – डब्ल्यूएएफ) ने सभी बलूच नागरिकों (खासकर महिलाओं सहित) की सम्मानजनक और सुरक्षित वापसी की मांग उठाई, जिन्हें Pakistanी अधिकारियों ने ‘मनमाने ढंग’ से गिरफ्तार कर रखा है. बयान में कहा गया है कि इन्हें या तो “बिना ट्रायल” के जेल में डाला जा रहा है या फिर “गलत, गैर-पारदर्शी ट्रायल” प्रक्रिया से काम लिया जा रहा है.
विमेंस फोरम की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, “डब्ल्यूएएफ बलूच एक्टिविस्ट्स का सम्मान करता है और उनसे हमदर्दी रखता है, जिन्होंने क्वेटा से कराची और लाहौर होते हुए इस्लामाबाद तक लंबा मार्च किया. क्वेटा और इस्लामाबाद में जवान और बुजुर्ग महिलाओं, बच्चों, और पुरुषों के बड़े समूह ने महीनों तक शांतिपूर्ण, अहिंसक धरने दिए. इन लोगों ने कड़ाके की ठंड, गर्मी, मानसून की बारिश और Governmentी हिंसा के बीच भी अपने विश्वास को डिगने नहीं दिया बल्कि भरपूर हिम्मत दिखाई. डब्ल्यूएएफ उन संगठन के कार्यकर्ताओं का व्यावहारिक और नैतिक दोनों तरह से उनका पूरा साथ दिया है.”
फोरम, जो Pakistan में महिलाओं के अधिकारों के लिए जानी जाती है, ने राज्य की ओर से लागू “सामूहिक सजा” की नीति की कड़ी निंदा की, जिसमें गायब किए गए लोगों के परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है.
जबरन गायब किए गए लोगों पर काम करने वाली दूसरी मानवाधिकार संगठनों, जिनमें वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स, बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी), डिफेंस ऑफ ह्यूमन राइट्स (डीएचआरओ), ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ Pakistan और दूसरी संस्थाएं शामिल हैं, की मांग दोहराई. मांग की कि जबरन गायब किए गए सभी लोगों को तुरंत अदालत के सामने पेश किया जाए, उन्हें उचित मुकदमा और न्याय मिले, और Pakistan की संसद को रिपोर्ट करने वाली एक स्वायत्त राज्य आयोग का गठन किया जाए.
अपना संकल्प दोहराते हुए, फोरम ने कहा कि वह Pakistan के दमन का विरोध कर रही बहादुर बलूच महिला कार्यकर्ताओं की मांगों के समर्थन में अपनी आवाज उठाता रहेगा.
फोरम ने जबरन गायब किए गए लोगों के सभी पीड़ितों को उनके प्रियजनों के पास वापस भेजने तक बलूच महिलाओं और पुरुषों के साथ खड़े रहने का प्रण दोहराया.
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केआर/