पाकिस्तान: चरमपंथियों के दबाव में अहमदिया अफसर को हटाया, मानवाधिकार संगठनों ने की निंदा

लंदन, 11 अगस्त . हाल ही में Pakistan के एक ओहदेदार अफसर को इसलिए स्थानांतरित गया क्योंकि वो अल्पसंख्यक अहमदिया मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखता था. मानवाधिकार संगठनों ने धार्मिक पहचान के आधार पर भेद करने की कार्रवाई की सख्त शब्दों में निंदा की है. आरोप लगाया है कि ये कदम कट्टरपंथियों के सोचे समझे कैंपेन के बाद उठाया गया.

यूके में मौजूद इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमेटी (आईएचआरसी) ने गहरी चिंता जताते हुए पूरी घटना का ब्योरा दिया. उन्होंने कहा, “पंजाब लैंड रिकॉर्ड्स अथॉरिटी (पीएलआरए) ने चिनियट जिले के लालियान में नगमान अहमद को असिस्टेंट डायरेक्टर लैंड रिकॉर्ड्स (एडीएलआर) के तौर पर पोस्ट किया था.

कट्टरपंथी ग्रुप खत्म-ए-नबुव्वत ऑर्गनाइजेशन से जुड़े लोगों ने उनकी नियुक्ति के खिलाफ अभियान चलाया. बार-बार उन्हें “कादियानी” (एक धार्मिक गाली, जो अहमदिया लोगों के खिलाफ इस्तेमाल होता है) कहा और अधिकारियों से उन्हें लालियन से हटाने की मांग की.”

मानवाधिकार संगठन के अनुसार, कुछ दिनों बाद, 8 अगस्त को, अधिकारियों ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर नगमान अहमद को तुरंत पीएलआरए हेडक्वार्टर में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया.

उसी आदेश में एक और अधिकारी को लालियन में असिस्टेंट डायरेक्टर लैंड रिकॉर्ड्स पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया.

इस पर आईएचआरसी ने कहा, “उसमें यह नहीं बताया गया कि अहमद को हेडक्वार्टर में रिपोर्ट करने का निर्देश क्यों दिया गया. हालांकि, ये जरूर कहा कि यह फैसला उन्हें हटाने की मांग को लेकर उठे अभियान के बाद लिया गया. इस ट्रांसफर को उनके खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे लोगों ने इसे अपनी कोशिशों का नतीजा बताया और जश्न मनाया.”

घटनाओं के क्रम को बहुत चिंताजनक बताते हुए,आईएचआरसी ने कहा, “एक अहमदिया मुस्लिम को Governmentी पद पर नियुक्त किया गया था. कट्टरपंथी समूहों ने उनकी धार्मिक पहचान के कारण सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई, उन्हें हटाने की मांग की और आगे विरोध की धमकी दी. बाद में उन्हें उस पोस्टिंग से हटा दिया गया, और वही ग्रुप्स अब इस नतीजे को अपनी जीत के रूप में मना रहे हैं.”

आगे कहा गया, “इस हालात में हम पंजाब के अधिकारियों से तुरंत और स्पष्ट जवाब मांगते हैं. अगर Governmentी अधिकारियों को इसलिए टारगेट किया जा सकता है और उनके पदों से हटाया जा सकता है क्योंकि कट्टरपंथियों को उनकी धार्मिक पहचान पर ऐतराज है, तो इसका असर भविष्य में और ज्यादा देखने को मिल सकता है. यह ऐसे माहौल को पनपने में मदद करता है जिसमें धार्मिक असहिष्णुता Governmentी संस्थाओं और Pakistanी नागरिकों के समान अधिकारों पर असर डाल सकती है.”

संगठन ने कहा कि अहमदिया समुदाय को पहले से ही पूरे Pakistan में गंभीर कानूनी और संस्थागत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है.

आईएचआरसी ने संयुक्त राष्ट्र, यूएन के विशेष प्रतिवेदकों, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और लोकतांत्रिक Governmentों से अपील की कि वे Pakistan में अहमदिया लोगों के बिगड़ते हालात पर करीब से नजर रखें और Pakistan Government परअंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए दबाव डालें, जिसमें बिना किसी भेदभाव के लोगों के धर्म की रक्षा हो सके.

इसमें अल्पसंख्यकों की एक और तकलीफ पर ध्यान दिलवाया गया है. बयान के अनुसार, “बच्चों में लगातार सांप्रदायिकता का बीज बोना, साथ ही धार्मिक अल्पसंख्यकों के अंतिम संस्कार और शोक की व्यवस्था में दखल देना, असहिष्णुता की एक बड़ी संस्कृति को दिखाता है जिस पर तुरंत इंटरनेशनल ध्यान देने की जरूरत है.”

केआर/

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