
New Delhi, 16 अप्रैल . Lok Sabha के विशेष सत्र में Thursday को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने परिसीमन बिल, 2026 पेश किया. इस बिल का उद्देश्य Lok Sabha में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सीटों का पुनर्निर्धारण करना, विधानसभा सीटों की संख्या तय करना और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को चुनावी क्षेत्रों में बांटना है.
जैसे ही बिल सदन में पेश हुआ, विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया. कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सबसे पहले विरोध जताया, जिसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया. इससे पहले सत्र की शुरुआत में सदन ने प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन पर शोक व्यक्त किया.
परिसीमन बिल को लेकर Samajwadi Party ने भी कड़ा रुख अपनाया. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि संसद को संविधान की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन यह बिल संविधान की भावना के खिलाफ है. उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन को जनगणना से अलग करना गलत है और इससे संवैधानिक ढांचा प्रभावित होगा.
धर्मेंद्र यादव ने यह भी कहा कि Samajwadi Party महिलाओं के हित में हमेशा आगे रही है और Government से मांग की कि इस संविधान संशोधन और परिसीमन बिल को वापस लिया जाए.
वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए Government से सवाल किया कि इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है. उन्होंने पूछा कि Government जनगणना क्यों नहीं करा रही है. इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि जनगणना का काम शुरू हो चुका है.
अमित शाह ने धर्मेंद्र यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे यह कह रहे हैं कि इसमें कॉलम नहीं है, जबकि उन्हें समझना चाहिए कि फिलहाल घरों की गिनती हो रही है, न कि उनकी जाति की. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर Samajwadi Party को मौका मिले, तो वह घरों की भी जाति तय कर दे.
केंद्रीय गृहमंत्री ने यह भी कहा कि धर्मेंद्र यादव द्वारा मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की बात करना असंवैधानिक है, क्योंकि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं है.
इस पर अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं आधी आबादी का हिस्सा नहीं हैं. इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि Samajwadi Party चाहे तो अपनी सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है.
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वीकेयू/वीसी