
New Delhi, 13 फरवरी . संसद परिसर में Friday को कांग्रेस सांसदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन उस समय हुआ, जब Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ मामले में लगाए गए आरोपों के बाद Union Minister हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग तेज हो गई. कांग्रेस सांसदों ने Government पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और संबंधित मंत्री को पद छोड़ना चाहिए.
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वे किसानों के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने से बात करते हुए कहा, “राहुल गांधी सही बोल रहे हैं. किसानों के खिलाफ समझौता किया जा रहा है और वे इस नई डील के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं. हम यह लड़ाई जारी रखेंगे, चाहे हमें सदस्यता से ही क्यों न हटा दिया जाए.”
राजीव शुक्ला ने बांग्लादेश के चुनावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वहां बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) की नई Government बनने जा रही है, जिसका नेतृत्व तारिक रहमान करेंगे. उन्होंने उम्मीद जताई कि नई Government India के साथ सहयोग और प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ेगी.
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया. उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “सदन में कुछ बयान सिर्फ चर्चा और कार्यवाही से ध्यान भटकाने के लिए दिए जाते हैं. वरना कुछ नहीं है, ये बयान सिर्फ मीडिया के लिए होते हैं. इनमें कोई असली गंभीरता नहीं होती.”
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ की एक पुनर्वास कॉलोनी में गंदे पानी की समस्या को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार पड़ गए हैं और कुछ बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. उन्होंने इसे बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है, ऐसे में वहां इस तरह की अव्यवस्था गंभीर सवाल खड़े करती है.
Lok Sabha सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भाजपा से सदन में शांति और सार्थक चर्चा की अपील की. उन्होंने कहा कि हंगामा नहीं होना चाहिए, बल्कि Government को जवाब देना चाहिए और विपक्ष को शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दे उठाने चाहिए. उन्होंने रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों पर चर्चा की मांग की. साथ ही उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक वकील की हत्या का मुद्दा उठाते हुए अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने की मांग दोहराई.
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एसएके/एबीएम