चैत्र मास की सप्तमी पर महाकाल का दिव्य श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

उज्जैन, 10 मार्च . 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में हर रोज सुबह की भस्म आरती लोकप्रिय रहती है. इस आरती के लिए भक्त देर रात से ही मंदिर परिसर पहुंचना शुरू कर देते हैं. Tuesday को चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर भगवान महाकाल का खास शृंगार किया गया.

इस मौके पर सुबह की भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली. देश-विदेश से आए श्रद्धालु बाबा का भव्य शृंगार देखने के लिए उत्सुक नजर आए. पूरा मंदिर बाबा के भक्तों की लंबी कतारों से भरा हुआ है. पूरा मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’ के जयकारों से गूंजता रहा. श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और आस्था साफ दिखाई दे रही थी.

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती अपनी खासियत के लिए जानी जाती है. इसमें भस्म से बाबा का अभिषेक किया जाता है, जो बहुत दिव्य और खास अनुभव देता है.

बाबा की भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है. इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं. वहीं, भस्म आरती होने के बाद बाबा का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा हुई और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया.

Madhya Pradesh के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की गई. इस दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया. इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था. अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई.

इसके बाद बाबा को चंदन से शृंगार किया गया व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला पहनाई गई. भक्त बाबा का अद्भुत शृंगार देखकर खुशी से गदगद दिखे. हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है. इस आरती में शामिल होने के लिए भक्त देश-विदेश से आते हैं.

एनएस/एएस

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