महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस भोपाल में निकालेगी मार्च, विधेयक तुरंत लागू करने की मांग

Bhopal , 26 अप्रैल ( .) नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधेयक को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच Political गतिरोध बढ़ता जा रहा है. इसी को लेकर Madhya Pradesh कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) Sunday को Bhopal में एक विरोध मार्च का आयोजन करेगी, जिसका उद्देश्य कानून को तत्काल लागू करने के लिए दबाव बनाना है.

यह मार्च दोपहर 4 बजे प्लैटिनम प्लाजा से शुरू होगा और टॉप एंड टाउन तथा न्यू मार्केट से होते हुए रोशनपुरा स्क्वायर पर समाप्त होगा. कांग्रेस पार्टी ने कहा कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य भाजपा Government के ‘महिला-विरोधी रवैये’ को उजागर करना और आरक्षण ढांचे को लागू करने में हो रही देरी को बेनकाब करना है. Madhya Pradesh कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ, इस मार्च का नेतृत्व करेंगे.

Madhya Pradesh कांग्रेस कमेटी ने एक बयान में कहा, “कांग्रेस Lok Sabha में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को परिसीमन से जोड़े बिना, सड़कों से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी.”

कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि आरक्षण ढांचे में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए.

पटवारी ने पूर्व Prime Minister राजीव गांधी के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों ने पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं की व्यापक भागीदारी को संभव बनाया. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि महिला आरक्षण विधेयक 2010 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में राज्यसभा में पारित हुआ था.

हालांकि, भाजपा ने इस विधेयक का जोरदार बचाव करते हुए इसे महिला सशक्तीकरण के लिए एक ऐतिहासिक सुधार बताया है. भाजपा का कहना है कि अधिनियम का कार्यान्वयन संवैधानिक रूप से अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ा है, जो निर्वाचन क्षेत्रवार आरक्षण निर्धारित करने के लिए आवश्यक हैं.

इस मतभेद के कारण दोनों दलों के बीच लगातार Political टकराव चल रहा है, जिसमें दोनों दल अलग-अलग बयान दे रहे हैं. कांग्रेस केंद्र पर देरी करने का आरोप लगा रही है, जबकि भाजपा का तर्क है कि संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए.

यह मुद्दा 27 अप्रैल को Madhya Pradesh विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा. कांग्रेस पार्टी ने अपनी विधायी रणनीति को अंतिम रूप देने और समन्वय स्थापित करने के लिए अपने विधायकों की बैठक बुलाई है, जिससे संकेत मिलता है कि वह इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी और सदन में भाजपा Government के रुख को चुनौती देगी.

सत्ताधारी पार्टी द्वारा अपने रुख का बचाव करने और विपक्ष द्वारा आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी के साथ, विधानसभा सत्र में महिला आरक्षण के समय, उद्देश्य और कार्यान्वयन को लेकर तीखी बहस होने की संभावना है.

Political विश्लेषकों का मानना ​​है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर चल रहा गतिरोध एक व्यापक Political और नीतिगत बहस में तब्दील हो गया है, जिसमें संवैधानिक प्रक्रिया, प्रतिनिधित्व और चुनावी स्थिति से जुड़े प्रश्न शामिल हैं, क्योंकि दोनों पार्टियां भविष्य के Political मुकाबलों से पहले महिला सशक्तीकरण पर जनमत को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं.

ओपी/एएस

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