
New Delhi, 22 अप्रैल . प्रसव के बाद कई महिलाओं को लगता है कि उनके स्तन में दूध पर्याप्त नहीं बन रहा है, जिस वजह से बच्चा भूखा रह जाता है. लेकिन यह एक आम समस्या है और इसमें घबराने की जरूरत नहीं होती. आयुर्वेद के अनुसार स्तनपान, यानी दूध बनने की प्रक्रिया शरीर, मन और खानपान तीनों पर निर्भर करती है. अगर इन तीनों में असंतुलन हो जाए तो दूध कम बनने की समस्या हो सकती है.
आयुर्वेद में माना जाता है कि प्रसव के बाद महिला का शरीर काफी कमजोर हो जाता है. अगर इस समय सही पोषण न मिले, पर्याप्त आराम न मिले और मानसिक तनाव ज्यादा हो, तो दूध बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. कई बार चिंता, नींद की कमी और कमजोरी भी इसका बड़ा कारण बनते हैं. इसके अलावा अगर महिला बहुत ज्यादा उपवास करे या ठीक से पानी न ले, तो भी इसका असर दूध उत्पादन पर पड़ता है.
कई बार मां को खुद महसूस होता है कि दूध कम बन रहा है और बच्चे का पेट ठीक से नहीं भर पा रहा है. बच्चे का वजन धीरे-धीरे बढ़ता है या वह कमजोर दिखने लगता है. कुछ मामलों में बच्चे को कब्ज जैसी समस्या भी हो सकती है.
आयुर्वेद में इसका समाधान बहुत सरल और प्राकृतिक बताया गया है. सबसे पहले मां को मानसिक रूप से शांत रहना बहुत जरूरी है. तनाव और चिंता को कम करना सबसे बड़ा उपाय है, क्योंकि मानसिक स्थिति सीधे दूध उत्पादन पर असर डालती है.
खानपान में भी सुधार जरूरी है. आयुर्वेद के अनुसार मां को हल्का, पौष्टिक, गर्म और तरल भोजन लेना चाहिए. दूध, घी और दूध से बने हल्के पदार्थ फायदेमंद माने जाते हैं. इसके अलावा कुछ औषधीय चीजें भी दूध बढ़ाने में मदद करती हैं, जैसे शतावरी, मेथी, जीरा, लहसुन और यष्टिमधु. ये प्राकृतिक रूप से शरीर को ताकत देते हैं और स्तनपान को बढ़ाने में मदद करते हैं.
पानी और तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में लेना भी बहुत जरूरी है. मां को भूखा या प्यासा नहीं रहना चाहिए. आराम और नींद भी उतनी ही जरूरी है जितना अच्छा खाना. शरीर जितना रिलैक्स रहेगा, उतना ही बेहतर दूध बनेगा.
सबसे जरूरी बात यह है कि मां को बच्चे को समय-समय पर दूध पिलाते रहना चाहिए. इससे शरीर को संकेत मिलता है कि दूध की जरूरत है और उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. कई बार शुरुआत में दूध कम होता है लेकिन नियमित फीडिंग से स्थिति अपने आप ठीक हो जाती है.
अगर फिर भी दूध पर्याप्त न बढ़े और बच्चा ठीक से वजन न बढ़ा रहा हो, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट या फॉर्मूला मिल्क का सहारा लिया जा सकता है.
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पीआईएम/पीएम