
New Delhi, 21 अप्रैल . आतंकी गतिविधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने 2022 के चर्चित शिवमोग्गा आईएसआईएस आतंकी साजिश मामले में तीसरे आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है. Bengaluru स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने आरोपी आराफत अली को 6 साल के कठोर कारावास की सजा दी है.
इससे पहले, नवंबर 2025 में इसी मामले में दो अन्य आरोपियों को भी 6-6 साल की सजा सुनाई जा चुकी है. अब तक इस केस में तीन दोषियों को सजा मिल चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी है.
जांच एजेंसी के अनुसार, आराफत अली जनवरी 2020 में गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़कर फरार हो गया था. बाद में सितंबर 2023 में जब वह New Delhi स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचा, तब एनआईए ने उसे गिरफ्तार कर लिया था. एनआईए की जांच में सामने आया कि आराफत अली प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस का सक्रिय सदस्य था. वह India में इस संगठन की हिंसक विचारधारा को फैलाने की साजिश में शामिल था. एजेंसी के मुताबिक, वह युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और उन्हें शिवमोग्गा आईएसआईएस मॉड्यूल में भर्ती करने का काम करता था.
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने अन्य आरोपियों को मंगलुरु शहर में आईएसआईएस और अन्य आतंकी संगठनों, जैसे लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन में भड़काऊ ग्रैफिटी लिखने के लिए उकसाया. इस साजिश का मकसद अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच दुश्मनी पैदा करना और समाज में हिंसा व अशांति फैलाना था.
एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि आराफत अली एक ऑनलाइन आईएसआईएस हैंडलर के संपर्क में था. वह क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से आतंकी फंड प्राप्त करता था और इसे अन्य आरोपियों के बीच बांटता था, जिससे आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके.
यह मामला सितंबर 2022 में कर्नाटक Police द्वारा दर्ज किया गया था. शुरुआती जांच में दो लोगों की गिरफ्तारी हुई थी. बाद में एनआईए ने केस अपने हाथ में लेकर 10 और आरोपियों को गिरफ्तार किया. एजेंसी ने इस मामले में कुल 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इनमें से तीन को अब तक सजा मिल चुकी है, जबकि बाकी 9 आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई जारी है.
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पीएसके