भारत की पहली बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली से पहले दिन करीब 41,500 वाहन गुजरे

New Delhi, 2 मई . India की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली ने संचालन के पहले दिन करीब 41,500 वाहनों की आवाजाही दर्ज की. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा Saturday को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई.

यह प्रणाली Gujarat में एनएच-48 के सूरत-भरूच मार्ग पर स्थित चोरयासी टोल प्लाजा पर शुरू की गई है. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा लागू इस व्यवस्था के तहत वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकते हैं. इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) और फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है.

बैरियर-लेस ढांचा यातायात को सुगम बनाने, मानवीय हस्तक्षेप कम करने और टोल प्लाजा पर रुकावट खत्म करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इससे जाम कम होगा, यात्रा समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में भी कमी आएगी.

इस नई प्रणाली की घोषणा Friday को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की थी. उन्होंने इसे India के टोलिंग सिस्टम के डिजिटलीकरण और वैश्विक मानकों के अनुरूप हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया.

गडकरी ने कहा कि यह व्यवस्था नागरिकों के जीवन को आसान बनाएगी और माल ढुलाई व लॉजिस्टिक्स की तेज एवं कुशल आवाजाही से कारोबार सुगमता को बढ़ावा देगी.

केंद्र Government पहले ही अप्रैल 2026 से राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क प्लाजा पर पूरी तरह डिजिटल टोल संग्रह व्यवस्था लागू कर चुकी है, जहां भुगतान फास्टैग और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से किया जा रहा है.

देश में फास्टैग की पहुंच 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है, जिससे टोल वसूली प्रणाली में बड़ा बदलाव आया है.

एनएचएआई ने हाईवे उपयोगकर्ताओं को अपने फास्टैग खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखने की सलाह दी है. यदि खाते में पर्याप्त राशि नहीं होगी या फास्टैग अमान्य पाया गया, तो इलेक्ट्रॉनिक नोटिस जारी किया जाएगा और 72 घंटे के भीतर भुगतान करना होगा. ऐसा न करने पर दोगुना टोल शुल्क लगाया जा सकता है.

एमएलएफएफ प्रणाली केंद्र Government की आधुनिक, पारदर्शी और यात्रियों के अनुकूल राजमार्ग नेटवर्क बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है.

डीएससी

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