
New Delhi, 14 अप्रैल . खट्टी-मिठी इमली न सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी प्राकृतिक खजाना है. पोषक तत्वों से भरपूर इमली पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ-साथ बढ़ते वजन को नियंत्रित करने में भी बेहद प्रभावी है.
बिहार Government के पर्यावरण एवं वन विभाग के मुताबिक, इमली केवल एक बड़ा और छायादार पेड़ नहीं है, बल्कि स्वाद और सेहत दोनों का अनमोल उपहार है. यह जंगलों, खेतों और सड़कों के किनारे आसानी से मिल जाती है. इसकी झुकी हुई शाखाएं और खुरदरी भूरी छाल इसे आसानी से पहचानने में मदद करती है. इमली का खट्टा-मीठा गूदा चटनी, सांभर, इमली पानी और कई पारंपरिक भारतीय व्यंजनों का अहम हिस्सा होता है.
इमली सदियों से आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में इस्तेमाल होती आ रही है. यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर में सूजन कम करती है और शरीर को एनर्जी देती है. इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम, फाइबर और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.
इमली पाचन क्रिया को सुधारती है, कब्ज दूर करती है और प्राकृतिक रूप से पेट साफ रखती है. यह खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाती है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाती है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है. इसके पॉलीफेनॉल्स और फ्लेवोनॉइड्स लिवर की रक्षा करते हैं व सूजन कम करने में मददगार होते हैं. साथ ही, यह ब्लड शुगर को संतुलित रखने और वजन नियंत्रण में भी मददगार होती है.
फल ही नहीं इमली की पत्तियां, छाल और बीज भी औषधीय गुणों से युक्त हैं. इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं.
गर्मियों में इमली का सेवन खासतौर पर फायदेमंद माना जाता है. सही मात्रा में अपनी डाइट में शामिल करके आप स्वाद और सेहत दोनों का लाभ ले सकते हैं. कुछ सावधानी बरतनी भी जरूरी है. इमली का सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में करें. ज्यादा मात्रा में खाने से दस्त, पेट दर्द या एसिडिटी हो सकती है. डायबिटीज के मरीज, गर्भवती महिलाएं, किडनी रोगी या कोई दवा ले रहे लोग डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसका इस्तेमाल करें. एसिडिक प्रकृति के कारण दांतों की इनेमल को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए खाने के बाद मुंह अच्छे से धो लें.
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एमटी/वीसी