मुनीर आत्मचिंतन करें, उनकी वजह से पाकिस्तान भुगत रहा: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 9 जून . Pakistan के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अपनी करनी और कथनी पर लगाम लगाने की सलाह आंकड़ों के हवाले से एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में दी गई है.

यूरेशिया रिव्यू की इस रिपोर्ट में मुनीर को नसीहत दी गई है कि बजाय आंकड़ों का हवाला देने और लगातार आक्रामक बयानबाजी के वो अपनी नीतियों और फैसलों के Pakistan पर पड़ रहे प्रभाव का गंभीरता से आकलन करें.

लेख में सेवानिवृत्त भारतीय सेना अधिकारी निलेश कुंवर ने दावा किया कि आसिम मुनीर ने अपना असली रंग 2024 के आम चुनावों को प्रभावित कर दिखाया. अपनी Political और सैन्य स्थिति को और मजबूत किया. लेख में यह भी कहा गया कि संवैधानिक संशोधनों के बाद मुनीर का प्रभाव Pakistan की सत्ता में और बढ़ गया है.

यूरेशिया रिव्यू में प्रकाशित अपने लेख में सेवानिवृत्त भारतीय सेना अधिकारी निलेश कुंवर ने दावा किया, ” Pakistan के 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) के रूप में देश की सशस्त्र सेनाओं के वास्तविक सर्वोच्च कमांडर बन गए हैं. इस संशोधन के तहत सीडीएफ पद को व्यापक अधिकार दिए गए हैं और उन्हें आजीवन कानूनी कार्रवाई से संरक्षण भी प्राप्त है. ये लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए असामान्य सी बात है. इससे जवाबदेही के बिना अत्यधिक शक्तियां एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रित हो जाती हैं.”

लेख में अफगानिस्तान के साथ Pakistan के संबंधों पर भी सवाल उठाए गए हैं. इसमें कहा गया है कि सीमा पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है.

कुंवर ने आगे कहा, ‘यदि Pakistan का यह दावा सही भी मान लिया जाए कि अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान Pakistan (टीटीपी) के लड़ाकों को शरण मिल रही है, तब भी अफगान क्षेत्र में कथित ठिकानों पर हवाई हमलों से सैन्य स्तर पर बहुत सीमित परिणाम ही हासिल हो सकते थे.”

कुंवर के अनुसार, एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी होने के नाते फील्ड मार्शल मुनीर इस बात से अवगत रहे होंगे कि ऐसी कार्रवाई से टीटीपी के खिलाफ निर्णायक सफलता मिलना मुश्किल है.

रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan को वर्तमान में कई आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इनमें खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ती आतंकी घटनाएं और बलूचिस्तान में जारी अशांति प्रमुख हैं. लेखक ने Pakistan इंस्टीट्यूट ऑफ पीस स्टडीज (पीपीआईएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2025 में देश में हुई आतंकवादी घटनाओं में से 71 प्रतिशत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में दर्ज की गईं.

उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के हमलों से अफगानिस्तान की Government और टीटीपी के बीच नजदीकियां बढ़ सकती हैं, जिससे डूरंड रेखा के आसपास पहले से मौजूद सुरक्षा चुनौतियां और जटिल हो सकती हैं.

बलूचिस्तान की स्थिति का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा नीतियों के कारण स्थानीय असंतोष बढ़ा है. साथ ही Pakistan अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ती पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई गई है.

लेखक का तर्क है, “आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के लिए बाहरी शक्तियों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय Pakistan के नेतृत्व को अपनी नीतियों की प्रभावशीलता पर विचार करना चाहिए. अमेरिका के पूर्व President अब्राहम लिंकन का एक प्रसिद्ध कथन है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को लंबे समय तक भ्रमित नहीं रखा जा सकता, हो सकता है मुनीर इस पर विचार करना चाहें!”

केआर/

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