
Lucknow, 2 मार्च . उत्तर प्रदेश को स्वच्छ प्रदेश बनाने की मुहिम समय के साथ तेज होती जा रही है. Chief Minister योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य Government अपशिष्ट जल को ‘आर्थिक संपत्ति’ में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. प्रतिदिन 4,500 मिलियन लीटर से अधिक सीवेज का शोधन किया जा रहा है. इस तरह प्रदेश अब लगभग 85 प्रतिशत गंदे पानी को उपचारित करने में सफल है.
Government गंगा-यमुना समेत राज्य की तमाम नदियों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है.
उल्लेखनीय है कि ‘नमामि गंगे मिशन’ के दूसरे चरण ने प्रदेश के सीवरेज सिस्टम को नई मजबूती दी है. उत्तर प्रदेश में अब तक 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 41 पूरी होकर संचालन में भी आ चुकी हैं. शेष परियोजनाओं पर तेजी से कार्य जारी है. राज्यभर में 155 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील हैं.
Chief Minister योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली ने नदियों के संरक्षण के प्रयासों को नई गति दी है. हर परियोजना की मॉनीटरिंग की जा रही है, जिससे न केवल गंगा-यमुना की पवित्रता सुनिश्चित हुई है, बल्कि नगरों में जल प्रबंधन की व्यवस्था भी मजबूत हो रही है.
Government के एक अधिकारी ने बताया कि योगी Government अब उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग की नीति तैयार कर रही है. योजना तीन चरणों में लागू होगी. पहला- नगरपालिका- पार्कों की सिंचाई, सड़क सफाई, सार्वजनिक उद्यानों में इस्तेमाल. दूसरा- उद्योग और कृषि-औद्योगिक प्रक्रियाओं व खेतों की सिंचाई के लिए. तीसरा- घरेलू गैर-पेय उपयोग- निर्माण कार्य समेत अन्य कार्यों में पुनर्चक्रण.
उन्होंने बताया कि जहां एसटीपी चालू हैं और क्षमता मौजूद है, वहां वर्ष 2030 तक 50 फीसदी और 2035 तक 100 फीसदी अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा. Chief Minister योगी आदित्यनाथ का यह कदम केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वच्छ नदियों के सपने को साकार करने की दिशा में निर्णायक साबित हो रहा है.
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विकेटी/एसके