मिजोरम ने उग्रवादी संगठन के साथ शांति समझौता किया

आइजोल, 14 अप्रैल . स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मिजोरम Government ने Tuesday को हमार पीपल्स कन्वेंशन-डेमोक्रेटिक (एचपीसी-डी (एलएफ)) के लालहमिंगथांगा सनाते के नेतृत्व वाले गुट के साथ एक ‘समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किए, जिससे राज्य में वर्षों से चली आ रही उग्रवाद की समस्या का प्रभावी रूप से अंत हो गया.

गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समझौते में उत्तरी और पूर्वोत्तर मिजोरम के हमार-बहुल सिनलुंग हिल्स काउंसिल क्षेत्र के लिए एक व्यापक विकास रोडमैप की रूपरेखा तैयार की गई है.

इस योजना में बजट आवंटन में वृद्धि, एक विशेष विकास पैकेज, बुनियादी ढांचे का उन्नयन और बेहतर कनेक्टिविटी शामिल है.

इस समझौते पर मिजोरम Government की ओर से गृह विभाग के सचिव डेविड लालथांतलुआंगा और इस समूह का प्रतिनिधित्व करते हुए एचपीसी-डी (एलएफ) के अध्यक्ष लालहमिंगथांगा सनाते ने हस्ताक्षर किए.

हस्ताक्षर समारोह में विधायक और Chief Minister के सलाहकार (Political) लालमुआनपुइया पुंते, और Police उप महानिरीक्षक (उत्तरी रेंज) रोडिंगलियाना चावंगथू सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे.

सभा को संबोधित करते हुए लालमुआनपुइया पुंते ने कहा कि जब विकास की उम्मीदें पूरी नहीं होतीं, तो अक्सर अशांति फैल जाती है.

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता सार्थक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस समझौते पर साकवरदाई में सार्वजनिक रूप से हस्ताक्षर करना कितना महत्वपूर्ण है, यह पिछली संधियों से अलग है, जिनके बारे में जनता को सीमित जानकारी ही मिल पाती थी. पुंते ने मिजोरम में हमार समुदाय के भीतर गुटीय विभाजन के समाप्त होने का भी स्वागत किया.

गृह सचिव डेविड लालथांतलुआंगा ने इस समझौते को मिजोरम की शांति और स्थिरता की यात्रा में एक मील का पत्थर बताया. उन्होंने याद दिलाया कि एचपीसी का गठन 1986 में हुआ था, और 1994 में उनके साथ एक शांति समझौता किया गया था.

इसके बाद, 2018 में एचपीसी (डी) के साथ एक समझौता हुआ, यह वह गुट था जो एचपीसी से अलग हो गया था, और Tuesday को एक और अलग हुए गुट, एचपीसी-डी (एलएफ) के साथ एक और समझौता किया गया.

इस वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने राहत व्यक्त करते हुए कहा कि अब मिजोरम में कोई भी सशस्त्र विद्रोही समूह शेष नहीं है. उन्होंने कहा कि इस नवीनतम समझौते के साथ, राज्य में अब कोई भी सशस्त्र विद्रोही समूह सक्रिय नहीं रह गया है.

गृह सचिव ने यह भी घोषणा की कि एचपीसी-डी (एलएफ) के सदस्यों के लिए मौचार गांव के पास एक शांति शिविर स्थापित किया जाएगा, और 30 अप्रैल, 2026 को ‘हथियार सौंपने’ का एक औपचारिक समारोह आयोजित किया जाएगा.

उन्होंने हिंसा का त्याग करने और शांतिपूर्ण मार्ग चुनने के लिए लालहमिंगथांगा सनाते और उनके समूह की सराहना की.

सनाते ने अपने संबोधन में कहा कि उनके समूह के 33 वर्षों के संघर्ष में महत्वपूर्ण बलिदान शामिल रहे हैं. उन्होंने राज्य नेतृत्व का धन्यवाद किया और विश्वास जताया कि Government हमार-बहुल इलाकों में विकास को प्राथमिकता देगी. उन्होंने समझौते को लागू करने में पूर्ण सहयोग का भी आश्वासन दिया.

मिजोरम Government ने 2024 के मध्य में एचपीसी-डी (एलएफ) के साथ बातचीत शुरू की, और इसे राज्य का आखिरी सक्रिय भूमिगत सशस्त्र समूह माना. सितंबर 2024 से मार्च 2026 के बीच बातचीत के कई दौर हुए, जिसका नतीजा Tuesday को हुए अंतिम समझौते के रूप में सामने आया.

इस समारोह की अध्यक्षता संयुक्त सचिव (गृह) पी.सी. लालदुहथलांगा ने की, और रेव. लांघमिंगथांग जोउते ने प्रार्थना की. वरिष्ठ अधिकारी, समुदाय के नेता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि, जिनमें सिनलुंग हिल्स काउंसिल और हमार समूह शामिल थे, इस अवसर पर उपस्थित थे.

समझौते के अनुसार, एचपीसी-डी (एलएफ) के 43 सदस्य 30 अप्रैल को सेसावंग स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित एक औपचारिक समारोह में अपने हथियार सौंप देंगे.

इस समझौते के साथ, मिजोरम अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण ‘ट्रांसफॉर्म मिजोरम 2047’ के अनुरूप, स्थायी शांति और समावेशी विकास की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया है.

एससीएच

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