
तिरुवनंतपुरम, 25 अप्रैल . फरवरी के आखिरी सप्ताह में कन्नूर रेलवे स्टेशन पर स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज के खिलाफ काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन करने के मामले में, केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के कार्यकर्ताओं पर दर्ज हत्या की कोशिश के केस में एक बड़ा मोड़ आ गया है. इस मामले में मंत्री के अपने बयान ने ही अभियोजन पक्ष के मुख्य आरोप को कमजोर कर दिया है.
घटना के लगभग दो महीने बाद Police जांच टीम को दिए अपने बयान में, जिसे रिकॉर्ड किया गया था, वीना जॉर्ज ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान केवल धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई थी.
यह बयान उनके गनमैन द्वारा लगाए गए उस आरोप को प्रभावी ढंग से कमजोर करता है कि उन्हें किसी हथियार से गर्दन पर चोट लगी थी; इसी आरोप के आधार पर पांच केएसयू कार्यकर्ताओं के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) लगाई गई थी.
जमानत मिलने से पहले आरोपी दो सप्ताह से ज्यादा समय तक जेल में रहे थे.
इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस सबूत न होने के कारण, रेलवे Police अब हत्या के प्रयास की धारा हटाने और चार्जशीट दाखिल करते समय कम गंभीर अपराधों के तहत आगे बढ़ने की तैयारी में है.
यह विरोध प्रदर्शन मंत्री के कन्नूर दौरे के दौरान हुआ, जहां उन्हें पांच जगहों पर काले झंडे दिखाकर विरोध का सामना करना पड़ा.
रेलवे स्टेशन पर स्थिति तब और बिगड़ गई, जिसकी वजह कथित तौर पर उसी दिन पहले पेरिंगोम में सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं द्वारा यूथ लीग के नेता शाजिर इकबाल पर किया गया हमला बताया जा रहा है.
प्लेटफॉर्म 1 पर, यह टकराव लगभग दो मिनट तक चला, जिसमें धक्का-मुक्की, चीख-पुकार और अफरा-तफरी मची रही.
इस घटना के बाद, मंत्री ने अपनी यात्रा रद्द कर दी और उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया.
जैसे ही यह खबर तेजी से फैली, Chief Minister विजयन सहित कई वरिष्ठ नेता उनसे मिलने पहुंचे.
उसी रात बाद में, उन्हें आगे की जांच के लिए Governmentी मेडिकल कॉलेज परियारम में शिफ्ट कर दिया गया.
घटनास्थल से गिरफ्तार किए गए पांचों केएसयू कार्यकर्ताओं को पहले टाउन Police ने हिरासत में लिया और बाद में रेलवे Police को सौंप दिया.
उसी रात First Information Report दर्ज की गई, और अगले दिन सुबह आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करके रिमांड पर भेज दिया गया. लगभग दो सप्ताह बाद उन्हें जमानत मिली.
खास बात यह है कि जिला अस्पताल के चोट प्रमाण पत्र में किसी हथियार से लगी चोट का कोई जिक्र नहीं था.
ड्यूटी पर तैनात Policeकर्मियों के बयान और स्टेशन के cctv फुटेज से भी हत्या के प्रयास का कोई संकेत नहीं मिला.
हालांकि परियारम अस्पताल के मेडिकल बुलेटिनों में बार-बार गर्दन की हड्डी (सर्वाइकल स्पाइन) वाले हिस्से में दर्द का जिक्र किया गया था, लेकिन किसी गंभीर हमले का कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया.
कई बार कोशिश करने के बावजूद, जांच अधिकारी पहले मंत्री का बयान दर्ज नहीं कर पाए थे.
चुनावों के बाद ही उन्होंने पूरी घटना का विस्तृत ब्योरा दिया, जिसके बाद इस मामले की दोबारा समीक्षा की गई.
इस घटनाक्रम से विपक्ष के उन दावों को बल मिलता है कि लगाए गए आरोप जरूरत से ज्यादा गंभीर थे, और इससे Political रूप से संवेदनशील स्थितियों में गंभीर आपराधिक धाराओं के इस्तेमाल को लेकर व्यापक सवाल खड़े होते हैं. इस घटना के बाद social media पर ट्रोलिंग का सिलसिला शुरू हो गया, जिसमें पत्रकार से मंत्री बने इस व्यक्ति को नकारात्मक रूप में दिखाया गया.
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एससीएच