शांति दूत की भूमिका में चीन

बीजिंग, 25 अप्रैल . पश्चिमी एशिया की जंग के बीच युद्ध विराम भले ही लागू हो, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी जारी है. दुनिया की आपूर्ति की लाइफ लाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विशेष रूप से तनातनी जारी है. विशेष रूप से दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए हैं. इस युद्ध के बीच भी चीन खुद को शांतिदूत और मध्यस्थ के तौर पर स्थापित करने की कोशिश में है.

चीन की पूरी कोशिश इस मसले का आधिकारिक रूप से कूटनीतिक समाधान निकालने की ओर है. इसके लिए इस महीने में चीन चार सूत्री शांति प्रस्ताव पेश कर चुका है. जिसमें देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान और बल प्रयोग न करने की अपील की थी. इसके साथ ही चीन Pakistan के साथ मिलकर एक ‘5-सूत्रीय शांति पहल’ की शुरूआत की थी. बेशक अमेरिका स्वीकार न करे,लेकिन इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई पहली दौर की बातचीत के पीछे कहीं न कहीं इस प्रस्ताव का भी योगदान जरूर रहा है.

चीन ने अप्रैल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. चीन का लगातार इस बात पर जोर है कि हॉर्मुज का रास्ता खुला रहे, ताकि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की चेन बनी रहे. पूरी दुनिया में बढ़ रही महंगाई और तेल संकट के लिए होर्मुज पर अनिश्चितता ही सबसे बड़ी वजह है. चीन ने अमेरिका द्वारा ईरानी जहाजों को जब्त करने और बंदरगाहों की नाकेबंदी की आलोचना करते हुए इसे “गैर-जिम्मेदाराना” बताया है.

चीन का खुला रूख पश्चिम एशिया में शांति की स्थापना है. दरअसल चीन का प्राथमिक उद्देश्य अपनी ऊर्जा आपूर्ति यानी तेल को सुरक्षित रखना और खुद को अमेरिका के मुकाबले एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में दिखाना है. ताजा हालात के मुताबिक, ईरान-इजरायल और अमेरिका संघर्ष में चीन मुख्य रूप से कूटनीतिक शांतिदूत और प्रायोजक के रूप में सामने आ रहा है.

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध में चीन ने सीधे हिस्सा लिए बिना शांति को लेकर ना ना सिर्फ कूटनीति और बातचीत पर जोर दे रहा है. चीन के लिए जरूरी भी है कि एशिया में लंबी अवधि तक के लिए युद्ध ना चले. सप्लाई चेन बाधित होने की वजह से वैश्विक स्तर पर बढ़ रही महंगाई में और इजाफा ही होगा. इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना अवश्यंभावी है.

अब तो दुनिया के तमाम देश चाहते हैं कि युद्ध खत्म हो. दुनिया को उम्मीद है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष विराम बढ़ता रहेगा और दुनिया का जीवन पटरी पर आ सकेगा.

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

डीकेपी/

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