
अगरतला, 18 दिसंबर . त्रिपुरा में भूजल स्तर स्थिर रहने के मद्देनजर, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य Government ने वर्षा जल संरक्षण को मजबूत करने और आने वाले वर्षों में सतत जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं. यह जानकारी राज्य के कृषि और किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने Thursday को दी.
मंत्री ने यहां प्रज्ञा भवन में Prime Minister कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत वाटरशेड विकास परियोजना पर एक महत्वपूर्ण कार्यकारी समिति की बैठक की अध्यक्षता की.
उन्होंने कहा कि वर्षा जल पर निर्भर राज्यों को आने वाले दिनों में अपनी योजनाओं पर विचार करना चाहिए, इसीलिए यह योजना शुरू की गई है.
उन्होंने आगे कहा कि वर्षा जल को मिट्टी में गिरने के बाद संग्रहित करने के लिए हमने यह पहल की है. इसीलिए हम वाटरशेड, चेक डैम, तालाब आदि का निर्माण कर रहे हैं. हम इस पर धन खर्च कर रहे हैं और लगभग सफल भी हो चुके हैं. मार्च के बाद चरण 3.0 शुरू होगा.
उन्होंने बताया कि Haryana, पंजाब और Rajasthan जैसे राज्य वर्षाजल पर निर्भर नहीं हैं. बल्कि वे व्यक्तिगत और कृषि कार्यों के लिए भूजल का उपयोग करते हैं. हालांकि, भूजल स्तर घटने के कारण अब वे जल संकट का सामना कर रहे हैं.
मंत्री नाथ ने कहा कि त्रिपुरा की स्थिति सुरक्षित है, क्योंकि राज्य में भूजल का केवल 9.7 प्रतिशत ही उपयोग होता है, जबकि असम में 15 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 52 प्रतिशत उपयोग होता है. लेकिन हमें आने वाली पीढ़ी के बारे में सोचना होगा. इसीलिए Prime Minister कृषि सिंचाई योजना के तहत यह वाटरशेड विकास परियोजना शुरू की गई है.
कृषि मंत्री ने कहा कि इस कार्यकारी बैठक के माध्यम से हम यह तय कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में हम अधिक वर्षा जल कैसे संग्रहित कर सकते हैं और लोगों को आत्मनिर्भर कैसे बना सकते हैं. उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि शेष धनराशि 15 जनवरी, 2026 तक खर्च कर दी जाए, ताकि अगली परियोजना में राज्य के विकास के लिए अधिक धनराशि लाई जा सके.
Chief Minister माणिक साहा ने कहा कि बैठक में सभी आठ जिला परिषदों के जिला सभापति उपस्थित थे.
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एमएस/डीकेपी