
रांची, 8 अगस्त . Jharkhand में छात्र संगठनों की विभिन्न मांगों को लेकर Government और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर जारी है. मंत्री चमरा लिंडा के नेतृत्व में Governmentी प्रतिनिधियों ने आदिवासी छात्र संघ, आदिवासी हॉस्टल और अन्य छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं और मांगें सुनीं. बैठक में Governmentी नियुक्तियों में बैकलॉग, स्थानीय और जनजातीय भाषाओं के संरक्षण, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरियों में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को क्वालिफाइंग पेपर के रूप में शामिल करने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए.
बैठक के बाद मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि यह संभवतः छात्र संगठनों के साथ बातचीत का अंतिम चरण था. आदिवासी छात्र संघ और आदिवासी हॉस्टल से जुड़े प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं और मांगों को Government के सामने रखा. बैठक में कई ऐसी त्रुटियों और समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया गया, जिन्हें लगभग सभी छात्र संगठनों ने उठाया है. आदिवासी छात्र संघ और आदिवासी संगठनों ने मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण मुद्दे Government के सामने रखे. पहला मुद्दा Governmentी नौकरियों में बैकलॉग पदों पर नियुक्ति का है. छात्र संगठनों का कहना है कि कई विभागों और Governmentी नौकरियों में आदिवासी एवं अन्य आरक्षित वर्गों के पद खाली रह जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं हो पाती. संविधान और कानून में प्रावधान होने के बावजूद बैकलॉग पदों पर समय पर नियुक्ति नहीं होना गंभीर विषय है. छात्र संगठनों ने इन रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग Government के सामने रखी है.
उन्होंने बताया कि बैठक में दूसरा प्रमुख मुद्दा Jharkhand की जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और उनके इस्तेमाल को बढ़ावा देने का रहा. आदिवासी संगठनों ने मांग की कि राज्य की जनजातीय भाषाओं को संरक्षित और सुरक्षित किया जाए तथा शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उन्हें उचित स्थान दिया जाए. छात्र संगठनों का कहना है कि बच्चों को स्कूल से लेकर कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर तक अपनी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के अध्ययन का अवसर मिलना चाहिए. साथ ही, Governmentी नियुक्तियों और परीक्षाओं में भी इन भाषाओं की भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए. छात्र संगठनों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को Government ने गंभीरता से सुना और उनका आकलन किया है. अब इन मांगों और सुझावों को Chief Minister के समक्ष रखा जाएगा.
Government की ओर से बैठक में मौजूद सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि Government ने छात्रों और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करने का प्रयास किया है. उन्होंने बताया कि छात्रों से सुझाव लेने के लिए एक ई-मेल आईडी भी जारी की गई है. उन्होंने तमाम छात्रों से अपील की कि अगर उनके पास परीक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया या उससे जुड़े अन्य विषयों में सुधार को लेकर कोई सुझाव है, तो वे Government तक अपनी बात पहुंचाएं. छात्रों से प्राप्त सुझावों को भी Government अपनी आगे की कार्यवाही में शामिल करेगी और उसी के अनुरूप निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा.
आदिवासी छात्र संघ के संयोजक डॉ. सुशील कुमार ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि छात्र संगठनों ने Government के सामने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखी हैं. उन्होंने Jharkhand की पहचान और पांचवीं अनुसूची से जुड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि Jharkhand को सामान्य राज्य की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने स्थानीय नीति को लेकर भी Government से स्पष्ट निर्णय की मांग की. डॉ. सुशील कुमार का आरोप है कि Jharkhand बनने के लंबे समय बाद भी राज्य में स्पष्ट स्थानीय नीति घोषित नहीं हो सकी है, जिसका असर रोजगार और स्थानीय लोगों के अवसरों पर पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि आदिवासी छात्र संघ राज्य में आयोजित कुछ गतिविधियों और कार्यक्रमों को लेकर भी अपना विरोध दर्ज कराता रहा है. उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हो रही गतिविधियों को लेकर भी संगठन की आपत्ति जताई और कहा कि संगठन स्थानीय छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग करता है.
बैठक में आदिवासी हॉस्टल के प्रतिनिधि कार्तिक उरांव ने भी छात्रों की कई मांगें सामने रखीं. उन्होंने विशेष रूप से सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया. उनका कहना है कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और इसे तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी मांग की कि जेपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं की भी जांच कराई जाए. छात्र प्रतिनिधियों ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है.
कार्तिक उरांव ने कहा कि थर्ड ग्रेड और फोर्थ ग्रेड की Governmentी नौकरियों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को भी क्वालिफाइंग पेपर के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए. जिस तरह हिंदी-अंग्रेजी को क्वालिफाइंग पेपर के तौर पर रखा जाता है, उसी तरह Jharkhand की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के लिए भी क्वालिफाइंग पेपर होना चाहिए. इसके बाद भर्ती परीक्षा के अन्य पेपर अपनी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आयोजित किए जा सकते हैं.
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पीएसके/एबीएम