बाजार की पाठशाला: ‘बुढ़ापे की लाठी’ बन सकती है ये सरकारी स्कीम! हर महीने सिर्फ 55 रुपए जमा करके पा सकते हैं 3,000 रुपए मासिक पेंशन

New Delhi, 31 मई . देश के करोड़ों असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए बुढ़ापे में नियमित आय की व्यवस्था करना हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्र Government Prime Minister श्रम योगी मानधन योजना (पीएम-एसवाईएम) संचालित कर रही है. यह एक ऐसी पेंशन योजना है, जिसके तहत बहुत कम मासिक योगदान देकर भविष्य में सुनिश्चित पेंशन का लाभ लिया जा सकता है. इस योजना का उद्देश्य उन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, जो रोजमर्रा की आय पर निर्भर रहते हैं और रिटायरमेंट के बाद आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं होता.

Prime Minister श्रम योगी मानधन योजना के तहत लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपए की निश्चित पेंशन दी जाती है. यानी सालाना 36,000 रुपए की आय सुनिश्चित होती है. खास बात यह है कि योजना में जितनी राशि लाभार्थी जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र Government भी उसके खाते में योगदान के रूप में जमा करती है. इस तरह व्यक्ति की बचत पर Government भी बराबर की भागीदारी निभाती है.

यह योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए बनाई गई है. इसमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, निर्माण मजदूर, खेतिहर श्रमिक, बुनकर, मोची, धोबी और इसी तरह के अन्य कामगार शामिल हैं. योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसकी मासिक आय 15,000 रुपए या उससे कम होनी चाहिए.

हालांकि, जो व्यक्ति पहले से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) जैसी योजनाओं का सदस्य है अथवा आयकरदाता है, वह इस योजना के लिए पात्र नहीं माना जाता.

इस योजना में जमा की जाने वाली राशि व्यक्ति की उम्र के अनुसार निर्धारित होती है. यदि कोई व्यक्ति 18 वर्ष की आयु में स्कीम से जुड़ता है, तो उसे केवल 55 रुपए प्रति माह जमा करने होते हैं. Government भी उसके खाते में 55 रुपए का योगदान देती है. इसी प्रकार उम्र बढ़ने के साथ मासिक योगदान की राशि भी बढ़ती जाती है.

उदाहरण के तौर पर 29 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को हर महीने 100 रुपए जमा करने होते हैं, जबकि 40 वर्ष की आयु में शामिल होने वाले व्यक्ति का मासिक योगदान 200 रुपए होता है. 60 वर्ष की आयु तक नियमित योगदान करने के बाद पेंशन का लाभ शुरू हो जाता है.

योजना में नामांकन की प्रक्रिया काफी सरल रखी गई है. इच्छुक व्यक्ति अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए आधार कार्ड, बैंक या जनधन खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होती है. शुरुआती योगदान जमा करने के बाद बैंक खाते से ऑटो-डेबिट सुविधा सक्रिय कर दी जाती है, जिससे हर महीने तय राशि स्वतः कटती रहती है.

इसके अलावा, इच्छुक लोग ऑनलाइन माध्यम से भी योजना के लिए पंजीकरण कर सकते हैं. सफल रजिस्ट्रेशन के बाद लाभार्थी को एक यूनिक पेंशन नंबर के साथ श्रम योगी पेंशन कार्ड जारी किया जाता है.

यदि कोई सदस्य किसी कारणवश योजना को बीच में छोड़ना चाहता है, तो उसके लिए भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं. 10 वर्ष से पहले योजना से बाहर निकलने पर जमा की गई राशि और उस पर मिलने वाला बचत खाते के बराबर ब्याज वापस कर दिया जाता है. वहीं, 10 वर्ष पूरे होने के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु से पहले बाहर निकलने की स्थिति में सदस्य को अधिक लाभकारी ब्याज दर के साथ जमा राशि लौटाई जाती है.

इस योजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह परिवार को भी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है. यदि 60 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है. वहीं, पेंशन शुरू होने के बाद सदस्य के निधन की स्थिति में उसके जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन मिलती रहती है. यानी हर महीने 1,500 रुपए की पेंशन जीवनसाथी को आजीवन प्रदान की जाती है.

इस तरह, Prime Minister श्रम योगी मानधन योजना उन कामगारों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिनके पास भविष्य के लिए कोई पेंशन व्यवस्था नहीं है. छोटी-सी मासिक बचत और Government के बराबर योगदान की मदद से यह योजना बुढ़ापे में नियमित आय का भरोसा देकर ‘बुढ़ापे की लाठी’ बन सकती है.

डीबीपी

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