महाराष्ट्र : सरकारी सेवाएं अब डिजिटल-फर्स्ट होंगी, दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत खत्म

Mumbai , 3 अगस्त . Maharashtra Government ने सभी प्रशासनिक विभागों में ‘प्रोसेस री-इंजीनियरिंग’ के तहत पांच बड़े सुधार लागू करने का आदेश दिया है. इनका मकसद ऑफिस में जाकर काम करवाने की जरूरत को खत्म करना, मंजूरी की प्रक्रियाओं के चरणों को काफी कम करना और लोगों तक Governmentी सेवाएं तेजी से पहुंचाना है.

Monday को राज्य योजना विभाग द्वारा जारी Governmentी आदेश (जीआर) के तहत, ‘गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग’ (जीपीआर) पहल का मकसद Governmentी कल्याणकारी योजनाओं और रोजमर्रा की प्रशासनिक सेवाओं को पारदर्शी, सुलभ और डिजिटल-फर्स्ट बनाना है.

जीआर के अनुसार, विभागों को पूरी तरह से ऑनलाइन वेरिफिकेशन और डिजिटल वैलिडेशन सिस्टम पर निर्भर रहना होगा ताकि नागरिकों को Governmentी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें. आधार और महा-समन्वय जैसे मौजूदा डेटाबेस से नागरिकों का डेटा सीधे ऑटो-फेच करके फॉर्म को आसान बनाया जाएगा.

जहां डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद हैं, वहां फिजिकल डॉक्यूमेंट जमा करने की प्रक्रिया खत्म कर दी जाएगी. विभाग डिजीलॉकर और एपीआई इंटरऑपरेबिलिटी का इस्तेमाल करेंगे और मुख्य रूप से सेल्फ-डिक्लेरेशन (स्व-घोषणा) पर निर्भर रहेंगे.

जीआर में यह भी कहा गया है कि फैसले लेने की प्रक्रिया को ज्यादा से ज्यादा तीन प्रशासनिक स्तरों तक सीमित रखा जाएगा और हर स्तर पर भूमिकाएं स्पष्ट रूप से तय होंगी ताकि नौकरशाही की वजह से होने वाली देरी को खत्म किया जा सके.

‘राइट टू सर्विसेज’ (आरटीएस) एक्ट के तहत अपडेटेड कानूनी समय-सीमा के साथ, बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से प्रोसेसिंग का समय कम किया जाएगा.

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य-स्तरीय जीपीआर मंजूरी समिति इस बदलाव की निगरानी करेगी. समिति का काम विभागों के प्रस्तावों का मूल्यांकन करना, डिजिटल वर्कफ्लो को मान्य करना, संशोधित एप्लीकेशन फॉर्म को मंजूरी देना और आसान मंजूरी प्रक्रियाओं को मंजूरी देना होगा.

ऐसे ऑपरेशनल अपडेट जिनके लिए कानूनी बदलाव या उच्च-स्तरीय नीतिगत बदलाव की जरूरत नहीं है, उनके लिए प्रशासनिक विभागों के सचिव सीधे प्रक्रियात्मक आदेश जारी कर सकते हैं.

Governmentी पोर्टल में बदलाव करने और जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए राज्य की आईटी कंपनी ‘महा-आईटी’ को प्राथमिकता के आधार पर काम सौंपा गया है.

इससे पहले, Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने तेजी से फैसले लेने और सीधे जनता तक सेवा पहुंचाने के लिए “जीरो ब्यूरोक्रेसी” मॉडल, प्रोसेस री-इंजीनियरिंग और Governmentी विभागों के स्ट्रक्चरल री-स्ट्रक्चरिंग पर केंद्रित कई प्रशासनिक सुधारों की रूपरेखा तैयार की थी और उन्हें लागू किया था.

एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के तहत, राज्य कैबिनेट ने राज्य सचिवालय के पुनर्गठन को मंजूरी दी, जिसमें बिना कोई नया पद बनाए प्रशासनिक विभागों की संख्या 33 से बढ़ाकर 45 कर दी गई.

एससीएच

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