महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार को संगमनेर में खराब चिकित्सा सुविधाओं पर बयान पेश करने का दिया निर्देश

Mumbai , 18 मार्च . Maharashtra विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने Wednesday को राज्य Government को निर्देश दिया कि वह अहिल्यानगर जिले के संगमनेर में मेडिकल उपकरणों की कमी के मामले पर तुरंत संज्ञान ले. उन्होंने Government से सदन में जवाब भी मांगा है.

विधानसभा में संगमनेर क्षेत्र में जरूरी मेडिकल जांच सुविधाओं, खासकर एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों की भारी कमी का मुद्दा उठाया गया था. सदन के सदस्यों ने आम नागरिकों को हो रही मुश्किलों पर गहरी चिंता जताई. Governmentी सुविधाओं में इन मशीनों के उपलब्ध न होने के कारण नागरिकों को बुनियादी जांचों के लिए निजी अस्पतालों या बड़े शहरों तक लंबी दूरी तय करने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए, स्पीकर नार्वेकर ने सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में ऐसी गंभीर कमियों को दूर करने में हो रही देरी पर अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि पहले भी यह मामला सामने आने के बावजूद, इस कमी के संबंध में कोई ठोस समाधान या डेटा पेश नहीं किया गया था. उन्होंने कहा, “Government को संगमनेर की स्थिति का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए.”

उन्होंने प्रशासन को आगे निर्देश दिया कि वह चल रहे सत्र के समाप्त होने से पहले, पूरे राज्य में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों की कुल कमी से संबंधित डेटा संकलित करके पेश करे, जिसमें संगमनेर के मामले पर विशेष ध्यान दिया जाए.

अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए, स्पीकर नार्वेकर ने कहा कि सदन के पीठासीन अधिकारी के निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी यह मानता है कि वह विधायी पीठासीन अधिकारी के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी.

स्पीकर ने स्पष्ट किया कि Government से यह अपेक्षा की जाती है कि वह लंबित ‘ध्यानाकर्षण प्रस्तावों’ के जवाब सदन के पटल पर रखे. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ये जवाब अगले कार्य दिवस के अंत तक जमा नहीं किए जाते हैं, तो मुख्य सचिव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू की जा सकती है.

उन्होंने दोहराया कि राज्य Government को संगमनेर में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों की कमी पर एक विस्तृत बयान देना चाहिए और सत्र समाप्त होने से पहले पूरे राज्य का डेटा भी पेश करना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर जवाब देने में विफलता के परिणामस्वरूप शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई हो सकती है.

डीसीएच/

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