महाराष्ट्र: 21 साल पुराना मर्डर केस सुलझा, दोस्त की हत्या कर फरार आरोपी प्रयागराज से गिरफ्तार

Mumbai , 26 जून . Maharashtra की वसई क्राइम ब्रांच ने हत्या के 21 वर्ष पुराने एक मामले को सफलतापूर्वक सुलझाते हुए आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. दरअसल, करीब 21 वर्षों से अनसुलझे पड़े हत्या के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए मीरा-भाईंदर, वसई-विरार Police आयुक्तालय की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच यूनिट- 2) ने फरार आरोपी को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से गिरफ्तार किया.

Police आयुक्त निकेत कौशिक के निर्देश पर पुराने अनसुलझे हत्या के मामलों की दोबारा जांच के दौरान इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया. आरोपी ने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार करते हुए हत्या की वजह भी बताई है.

मामले को लेकर मदन बल्लाल (एसीपी, मीरा भायंदर वसई विरार Police आयुक्तालय) ने बताया कि 27 दिसंबर 2005 को विरार Police स्टेशन में अपराध क्रमांक 283/2005 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था. शिकायतकर्ता रत्नाकर शंकर चव्हाण (51) निवासी अर्नाला बंदरपाड़ा, किला रोड, वसई ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके चचेरे भाई दिलीप तुकाराम चव्हाण (30) की अज्ञात हमलावर ने सिर पर किसी धारदार हथियार से गंभीर वार कर हत्या कर दी थी. हत्या के बाद शव को सबूत मिटाने की नीयत से आगाशी-भाटीबंदर गांव की सीमा में खाड़ी किनारे फेंक दिया गया था.

मामले की पुनः जांच के दौरान क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने शिकायतकर्ता और पुराने गवाहों से विस्तृत पूछताछ की. गुप्त सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पता चला कि आरोपी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में अपने पैतृक गांव में छिपकर रह रहा है. इसके बाद Police टीम उत्तर प्रदेश रवाना हुई और 25 जून को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.

गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजेश सुरेश सोनकर (41) निवासी तलोंगज मनोरी, तहसील पुरामुप्ती, जिला प्रयागरा के रूप में हुई है. पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह और दिलीप चव्हाण मित्र थे तथा दोनों अर्नाला स्थित अर्नाला हिंदू होटल में सफाई का काम करते थे.

आरोपी के अनुसार, दिलीप के एक परिचित व्यक्ति ने उसकी पत्नी का रेप किया था और उसे संदेह था कि इस घटना में दिलीप ने उस व्यक्ति की मदद की थी. इसी रंजिश के चलते उसने अपने मित्र की हत्या कर दी. हत्या के बाद आरोपी पहले 5 से 6 वर्ष Lucknow में रहा और फिर पिछले लगभग 15 वर्षों से प्रयागराज में अपनी पहचान छिपाकर ई-रिक्शा चलाकर जीवनयापन कर रहा था.

यह कार्रवाई Police आयुक्त निकेत कौशिक, अपर Police आयुक्त संजय शिंत्रे, Police उपायुक्त (अपराध) संदीप डोईफोडे तथा सहायक Police आयुक्त (अपराध) मदन बल्लाल के मार्गदर्शन में की गई. अभियान का नेतृत्व क्राइम ब्रांच यूनिट-2 वसई के Police निरीक्षक अविराज कुराडे ने किया.

टीम में सहायक Police निरीक्षक सोपान पाटील, Police उपनिरीक्षक संतोष घाडगे, अजित गिते, संजय नवले, मुकेश पवार, मनोज मोरे, चंदन मोरे, प्रफुल्ल पाटील, सचिन पाटील, जगदीश गोवारी, दादा आडके, अनिल साबले, अक्षय बांगर, रामेश्वर केकान सहित क्राइम ब्रांच यूनिट-2 के अधिकारी-कर्मचारी तथा साइबर Police स्टेशन के संतोष चव्हाण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

डीके/वीसी

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