बिहार: संजय झा के फरक्का बयान पर भड़के लालू प्रसाद यादव, बोले- पहले इतिहास और भूगोल समझें

Patna, 22 अगस्त . राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने फरक्का जलसंधि को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा पर तीखा हमला बोला है. लालू यादव ने संजय झा का नाम लिए बिना उन्हें ‘नौसिखिया’ बताते हुए कहा कि फरक्का बैराज के मुद्दे पर बोलने वालों को इसके इतिहास और भूगोल की जानकारी नहीं है.

लालू यादव ने Saturday को social media मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा कि राजद ने संसद से लेकर राज्य Government तक हर मंच पर फरक्का बैराज का कड़ा विरोध किया था. उन्होंने दावा किया कि उनकी दूरदृष्टि ने पहले ही पहचान लिया था कि पश्चिम बंगाल में गंगा नदी पर बने फरक्का बैराज से बिहार को गंभीर नुकसान और खतरा हो सकता है.

राजद अध्यक्ष ने कहा कि नीतीश कुमार ने संसद में फरक्का बैराज के मुद्दे पर कभी एक शब्द नहीं बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने अपने Political जीवन में दीर्घकालिक मुद्दों के बजाय तत्काल और क्षणिक लाभ वाली राजनीति को प्राथमिकता दी.

लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के Political सहयोगी बने लोगों को इस विषय पर बोलने से पहले बिहार के जल संसाधन विभाग जाकर गंगा में जल उपलब्धता की स्थिति, बांग्लादेश के साथ हुई अंतरराष्ट्रीय संधि के प्रभाव और तत्कालीन राज्य Government द्वारा किए गए प्रयासों का अध्ययन करना चाहिए.

उन्होंने जल संसाधन विभाग में उपलब्ध दस्तावेजों तथा तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह के केंद्र Government के साथ हुए पत्राचार को भी पढ़ने की सलाह दी.

दरअसल, वर्ष 1996 में India और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जलसंधि की अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है. इसे लेकर बिहार की जल सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर Political बहस के केंद्र में आ गया है.

जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने 20 अगस्त को प्रकाशित एक लेख में केंद्र Government से मांग की थी कि मौजूदा स्वरूप में फरक्का जलसंधि का नवीनीकरण नहीं किया जाए.

उन्होंने कहा था कि 1996 में समझौते के समय बिहार के हितों की अनदेखी हुई और पिछले तीन दशकों के अनुभव तथा आंकड़े इसके नुकसान को साबित करते हैं. संजय झा ने कहा था कि संधि की अवधि समाप्त होने के बाद बिहार सहित गंगा बेसिन के सभी राज्यों की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं का वैज्ञानिक आकलन कर नई व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए.

उन्होंने फरक्का समझौते को बिहार के दीर्घकालिक जल हितों से जोड़ते हुए केंद्र से इस दिशा में ठोस पहल की मांग की है. फरक्का जल संधि के नवीनीकरण को लेकर लालू यादव और जदयू के बीच शुरू हुई यह Political बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है.

एमएनपी/डीकेपी

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