जीविका और पीएमएफएमई योजना से ललिता देवी बनीं ‘लखपति दीदी’, अचार-पापड़ के कारोबार से बनाई पहचान

भागलपुर, 17 मई . बिहार Government की जीविका स्वयं सहायता समूह और केंद्र Government की Prime Minister सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) ने ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदल दी है. इसका एक शानदार उदाहरण हैं भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड के विशनपुर जिच्छो गांव की ललिता देवी, जो आज ‘लखपति दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं.

कभी बेहद गरीबी में गुजर-बसर करने वाली ललिता देवी दूसरे के घरों में काम करती थीं. घर की जिम्मेदारियों के साथ चार बच्चों की परवरिश करना उनके लिए चुनौती भरा था. लेकिन, जीविका समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में नई रोशनी आई. गांव की अन्य महिलाओं की तरह उनमें अचार, पापड़, बड़ी और पकौड़ी बनाने का पारंपरिक हुनर था, जिसे उन्होंने व्यवसाय में बदल दिया.

ललिता देवी ने पीएमएफएमई योजना के तहत पांच लाख रुपए के लोन के लिए आवेदन किया. उन्हें शुरुआत में दो लाख रुपए की सहायता मिली. इसी सहयोग से उन्होंने छोटे स्तर पर अपना अचार-पापड़ का कारोबार शुरू किया. आज उनका व्यवसाय लगातार बढ़ रहा है. वे न सिर्फ खुद अच्छी कमाई कर रही हैं बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं.

ललिता देवी ने से बात करते हुए कहा, “पहले हमें कोई नहीं जानता था, लेकिन अब भागलपुर में एक अलग पहचान बन गई है. राज्य और केंद्र Government को मैं दिल से धन्यवाद देती हूं. पहले मुझे 2 लाख मिले, तो मुझे हिम्मत आई कि मैं इस पैसे से कुछ कर सकती हूं. इस पैसे से मैंने व्यापार की शुरुआत की. मेरी चार बेटियां हैं, जिन्हें मैं पढ़ा रही हूं. योजना से आगे और भी पैसा लेकर मैं अपने व्यापार को बढ़ाऊंगी. Government ने बहुत अच्छी योजना चलाई है, जिससे आज गरीब दीदी एक लखपति दीदी के रूप में काम कर रही है.”

उन्होंने बताया कि पहले लोग ताने मारते थे कि इतनी गरीबी में बेटियों की पढ़ाई और शादी कैसे होगी. आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. उनकी तीनों बेटियां पढ़ाई के साथ-साथ कारोबार में भी हाथ बंटा रही हैं. अब परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से बच्चों का भविष्य भी उज्ज्वल हो गया है.

जीविका कार्यक्रम बिहार की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक बड़ा माध्यम बन गया है. पीएमएफएमई योजना के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्धता का लाभ मिल रहा है. ललिता देवी जैसी कई महिलाएं अब न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन रही हैं.

एससीएच/एबीएम

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