केरल ‘वंदे मातरम’ विवाद: एनडीए के नेताओं ने कहा- ‘राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रीय हितों से समझौता करती है कांग्रेस’

New Delhi, 30 मई . केरल में ‘वंदे मातरम’ विवाद पर एनडीए के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस पार्टी ने अपने Political अस्तित्व के लिए राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय हितों के साथ विश्वासघात करने में कभी संकोच नहीं किया.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने ‘वंदे मातरम’ विवाद पर से बातचीत में कहा, “कांग्रेस पार्टी अपनी साख खो चुकी है और केरल विधानसभा में ‘वंदे मातरम’ के गायन को छोटा करके धार्मिक ध्रुवीकरण का अपना जहरीला सांप्रदायिक एजेंडा फैला रही है. उसने उन देशभक्तों की पीढ़ियों के निस्वार्थ बलिदान का घोर अपमान और अनादर किया है, जिन्होंने हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ कहते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी. इतिहास ने बार-बार यह देखा है कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने अपने Political अस्तित्व के लिए राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय हितों के साथ विश्वासघात करने में कभी संकोच नहीं किया.”

‘वंदे मातरम’ गीत विवाद पर शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने केरल के Chief Minister पर निशाना साधते हुए कहा, “‘वंदे मातरम’ राष्ट्रगीत है. जब आप बहुवादी समाज की बात करते हैं तो इस गीत से इसकी शुरुआत होती है. मगर आप धार्मिक आरोपण लगाते हैं व सांप्रदायिक विभाजन को फैलाते हैं और फिर सांप्रदायिक सौहार्द्र की बात करते हैं. इस तरह का दोगलापन नहीं चलेगा.”

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “केंद्र Government की ओर से ‘वंदे मातरम’ को लेकर कानून के बाद नियम बन चुका है. हर Governmentी कार्यक्रम से पहले ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य है. कांग्रेस ने अपनी तुष्टिकरण की नीतियों के कारण मूल ‘वंदे मातरम’ से कुछ पंक्तियों को हटा दिया था, लेकिन इन पंक्तियों को फिर से जोड़ा गया है.”

उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ देश की आजादी से जुड़ा हुआ गीत है. यह वीरता का गीत है और संन्यासियों के त्याग को दिखाता है. ‘वंदे मातरम’ हमारी राष्ट्रीय चेतना का गान है. इसलिए अगर कोई भी इसका पालन नहीं करता है तो यह ‘वंदे मातरम’ का अपमान है.

उत्तर प्रदेश Government में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा, “अगर किसी को इस देश में रहना है, तो उसे ‘वंदे मातरम’ कहना ही होगा. Prime Minister ने यह बयान संविधान के दायरे में रहते हुए दिया है, और देश में हर किसी को इसका पालन करना होगा.”

डीसीएच/

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