
तिरुवनंतपुरम, 5 अगस्त . केरल Government की मुफ्त बस यात्रा योजना का लाभ उठाने वाली महिलाओं पर अपनी टिप्पणी को लेकर बढ़ती आलोचना का सामना कर रहे परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने Wednesday को खेद व्यक्त करते हुए कहा कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था. उन्हें अपने शब्दों का चुनाव अधिक सावधानी से करना चाहिए था.
मंत्री ने पत्रकारों से कहा, “मेरा इरादा कभी भी किसी की एकतरफा आलोचना करने का नहीं था. मुझे बोलते समय अधिक सावधान रहना चाहिए था. अगर मेरी बातों से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं खेद व्यक्त करता हूं.”
यह विवाद तब शुरू हुआ जब जॉन ने कहा कि महिलाएं प्रियदर्शनी बसों में भीड़ लगा रही हैं जबकि साथ ही साथ अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रही हैं.
इन टिप्पणियों ने Political दलों, महिला संगठनों और social media पर व्यापक आलोचना को जन्म दिया, जिसमें कई लोगों ने मंत्री पर असंवेदनशील होने और महिलाओं के बारे में रूढ़िवादिता फैलाने का आरोप लगाया.
अपनी बात स्पष्ट करते हुए जॉन ने कहा कि प्रियदर्शनी मुफ्त यात्रा योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मदद करने के उद्देश्य से एक कल्याणकारी उपाय है और इसे दान के कार्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “मुफ्त यात्रा किसी की उदारता नहीं है. यह एक अधिकार है. केरल में अभी भी भीषण गरीबी है और प्रियदर्शनी योजना का उद्देश्य उस बोझ को कम करना है.”
उन्होंने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि यह योजना केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) पर वित्तीय बोझ बन गई है और कहा कि निगम भारी मांग वाले मार्गों पर अधिक बसें तैनात करेगा.
हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि केएसआरटीसी के पुराने बेड़े अभी भी एक चुनौती बने हुए हैं.
जॉन की खेद व्यक्त करने की यह घटना उनके उन बयानों के ठीक एक दिन बाद आई है, जिसने एक Political तूफान खड़ा कर दिया था और Government को रक्षात्मक स्थिति में आने के लिए मजबूर कर दिया था.
हालांकि उन्होंने बिना शर्त माफी मांगने से परहेज किया लेकिन मंत्री का बयान विवाद को शांत करने के उद्देश्य से प्रतीत हुआ.
केरल की राजनीति के दिग्गज 69 वर्षीय सी.पी. जॉन ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के एक जोशीले नेता के रूप में की थी. 1986 में पार्टी से निष्कासन के बाद उन्होंने अपने गुरु एम.वी. राघवन के साथ सीपीआई (एम) छोड़ दी थी.
कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) से संबद्ध कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी (सीएमपी) में राघवन के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक बन गए.
पिछले कई दशकों में वे यूडीएफ के एक प्रमुख नेता बने रहे और वर्तमान Government में मंत्री के रूप में फिर से पदभार संभाला.
अपने Political करियर में उन्होंने इस चुनाव में पहली बार जीत का स्वाद चखा, इससे पहले दो बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
पूर्व Chief Minister पिनराई विजयन से लेकर निचले तबके तक उनके सभी पूर्व सीपीआई (एम) सहयोगियों ने जॉन की टिप्पणियों की निंदा की.
उनकी हालिया टिप्पणियों और उसके बाद व्यक्त किए गए खेद ने एक बार फिर इस मुखर मंत्री को Political विवाद के केंद्र में ला खड़ा किया है.
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एसएचक/पीएम