
कोच्चि, 11 फरवरी . केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला ग्लोबल अयप्पा मीट के आय और व्यय खातों में गंभीर विसंगतियों को चिह्नित किया है, यह देखते हुए कि अनियमितताएं प्रथम दृष्टया ‘गंभीर वित्तीय अनुशासनहीनता’ की ओर इशारा करती हैं. साथ ही त्रावणकोर देवासम बोर्ड को विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.
सबरीमाला ग्लोबल अयप्पा मीट पिछले साल सितंबर में पंबा में आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम था. एक डिवीजन बेंच ने खातों की जांच करते हुए कहा कि आयोजन से जुड़े निर्माण अनुबंध अनिवार्य निविदा प्रक्रियाओं का पालन किए बिना दिए गए थे. अदालत ने उठाए गए बिलों और कथित तौर पर आपूर्ति की गई सामग्रियों के बीच भी बेमेल पाया.
गौरतलब है कि कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बांटे गए प्रसाद का कोई उचित हिसाब-किताब नहीं था.
अदालत के समक्ष रखी गई ऑडिट रिपोर्ट से पता चला कि आयोजन के लिए खरीदे गए 150 बिस्तरों में से 50 का कोई हिसाब-किताब नहीं है. इसके अलावा, देवासम बोर्ड से निकाले गए 2 करोड़ रुपए अब तक चुकाए नहीं गए हैं.
अदालत ने कहा कि इस तरह की खामियां पहली नजर में गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन और प्रक्रियात्मक अनुपालन की कमी का संकेत देती हैं.
खातों के GST घटक में भी अनियमितताएं उजागर की गईं. जबकि बोर्ड 1.07 करोड़ रुपए के इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए पात्र है, अधिकारियों के साथ दाखिल रिटर्न में केवल 45.76 लाख रुपए दर्शाए गए हैं.
अदालत ने बताया कि इस पर कोई स्पष्टता नहीं है कि शेष 61 लाख रुपए बोर्ड के फंड में ठीक से जमा किए गए हैं या बाद की फाइलिंग में समायोजित किए गए हैं.
इसके अलावा, एक बिल में केबलिंग कार्य के लिए 2.80 लाख रुपए दिखाए गए हैं, लेकिन इस बात की पुष्टि करने वाला कोई प्रमाणन नहीं है कि कार्य वास्तव में आयोजन स्थल पर निष्पादित किया गया था.
विशेष आयुक्त ने Wednesday को उच्च न्यायालय के समक्ष खाते प्रस्तुत किए, और ऑडिट रिपोर्ट ने घटना के संबंध में प्रस्तुत वित्तीय विवरणों में कई विसंगतियों को रेखांकित किया.
अदालत ने अब ऑडिट में उजागर की गई विसंगतियों के संबंध में देवास्वोम बोर्ड से व्यापक प्रतिक्रिया मांगी है. इस बीच, देवस्वओम मंत्री वी.एन. वासवन ने कहा कि राज्य Government ने आयोजन के लिए केवल बुनियादी ढांचागत सहायता प्रदान की थी.
उन्होंने कहा कि प्रायोजन के माध्यम से 4 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं और बोर्ड को शेष खातों और वित्तीय प्रविष्टियों को स्पष्ट करना चाहिए.
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एससीएच