
चेन्नई, 2 मई . पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने Prime Minister Narendra Modi को पत्र लिखकर केंद्र से एक ऐतिहासिक कानून बनाने का आग्रह किया है, जिसके तहत 2009 या उसके बाद जन्मे व्यक्तियों के लिए तंबाकू उत्पादों की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाया जा सके. इसका उद्देश्य India में ‘धूम्रपान मुक्त पीढ़ी’ का निर्माण करना है.
Prime Minister और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखे अपने पत्र में अंबुमणि ने तंबाकू के सेवन के कारण उत्पन्न हो रहे गंभीर जन स्वास्थ्य संकट की ओर ध्यान दिलाया.
उन्होंने तर्क दिया कि पीढ़ी दर पीढ़ी लागू होने वाला प्रतिबंध देश भर में व्यसन और बीमारियों के बोझ को कम करने में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है.
वैश्विक और राष्ट्रीय अनुमानों का हवाला देते हुए पीएमके नेता ने कहा कि वर्तमान में लगभग 267 करोड़ भारतीय किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं, जिससे India विश्व स्तर पर सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक बन गया है. उन्होंने यह भी बताया कि तंबाकू से संबंधित बीमारियों के कारण देश में प्रतिवर्ष 13 लाख से अधिक मौतें होती हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है.
अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों से तुलना करते हुए अंबुमणि ने यूनाइटेड किंगडम के प्रस्तावित तंबाकू और वेप्स विधेयक का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य तंबाकू खरीदने की कानूनी उम्र को धीरे-धीरे बढ़ाना है, जिससे युवा पीढ़ी में धूम्रपान को प्रभावी रूप से समाप्त किया जा सके. उन्होंने India से आग्रह किया कि वह अपनी जनसांख्यिकीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप इसी तरह का विधायी ढांचा अपनाए.
उन्होंने कहा कि India में तंबाकू कैंसर और गैर-संक्रामक रोगों के प्रमुख कारणों में से एक है, जो लगभग 40 से 50 प्रतिशत कैंसर मामलों के लिए जिम्मेदार है. उन्होंने निर्णायक नीतिगत हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया.
2004 से 2009 तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए अंबुमणि ने उस दौरान शुरू किए गए कई तंबाकू-विरोधी उपायों पर प्रकाश डाला, जिनमें सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध और तंबाकू पैकेजिंग पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी के चित्र लगाना शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन कदमों से जागरूकता में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अब और अधिक सशक्त और दूरदर्शी नीतियों की आवश्यकता है.
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एमएस/