
तिरुवनंतपुरम, 17 अगस्त . Chief Minister वीडी सतीशन ने Monday को Prime Minister Narendra Modi को पत्र लिखकर खनन और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में किए गए संशोधनों की तत्काल समीक्षा करने का अनुरोध किया है.
उन्होंने चेतावनी दी कि इन परिवर्तनों से राज्यों की संवैधानिक और वित्तीय शक्तियां सीमित हो सकती हैं और केरल के राजस्व हितों को नुकसान पहुंच सकता है.
सीएम सतीशन ने खास तौर पर प्रस्तावित सेक्शन 9डी पर आपत्ति जताई है, जिसके तहत खनिज भंडार वाली जमीन पर टैक्स, सेस और अन्य शुल्क लगाने की शक्ति केंद्र Government द्वारा तय किए गए मानदंडों के अधीन होगी. उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा प्रावधान सीधे तौर पर राज्यों की संवैधानिक शक्तियों में दखल देगा.
उन्होंने कहा कि बिल में खनिज भंडार वाली जमीन को केंद्र के रेगुलेटरी दायरे में लाने और राज्य की बकाया टैक्स देनदारियों को खत्म करने के प्रावधान भी शामिल हैं.
Chief Minister ने चेतावनी दी कि प्रस्तावित बदलावों के केरल के लिए गंभीर वित्तीय परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि राज्य में खनिज संसाधन काफी मात्रा में हैं. उन्होंने कहा कि खनिज वाली जमीन पर राज्य की वित्तीय शक्तियों पर किसी भी तरह की रोक से न केवल राज्य के राजस्व पर, बल्कि स्थानीय स्व-शासन संस्थाओं की टैक्स आय पर भी असर पड़ेगा.
सतीशन ने Prime Minister मोदी से तुरंत दखल की मांग करते हुए केंद्र से उन प्रावधानों पर फिर से विचार करने का आग्रह किया, जिनसे केरल को लगता है कि राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता कमजोर हो सकती है.
Chief Minister ने माइनिंग अधिकारों पर Supreme Court के 2024 के फैसले का भी हवाला दिया और तर्क दिया कि उस फैसले में रॉयल्टी और टैक्स के बीच स्पष्ट अंतर बताया गया था. उन्होंने बताया कि कोर्ट ने कहा था कि माइनिंग अधिकारों के लिए दी जाने वाली रॉयल्टी कोई टैक्स नहीं है.
सतीशन ने कहा कि संविधान की 7वीं अनुसूची की लिस्ट-II की एंट्री 50 राज्यों को संवैधानिक ढांचे के तहत खनिज अधिकारों पर टैक्स लगाने की शक्ति देती है.
उन्होंने आगे बताया कि Supreme Court ने लिस्ट-II की एंट्री 49 के तहत राज्यों की उस शक्ति को मान्यता दी है, जिसके तहत वे खनिज उत्पादन की मात्रा या मूल्य के आधार पर खनिज संसाधनों वाली जमीन पर टैक्स लगा सकते हैं.
सतीशन ने तर्क दिया कि इसलिए, प्रस्तावित संशोधनों से उन शक्तियों के कमजोर होने का खतरा है जिन्हें संविधान के तहत पहले ही राज्यों की शक्तियां माना गया है.
Chief Minister का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वित्तीय शक्तियों को लेकर केंद्र-राज्य संबंध एक विवादित मुद्दा बन गए हैं. केरल की मुख्य चिंता यह है कि अगर खनिजों वाली जमीन पर नियंत्रण किसी और को सौंपा जाता है या राज्य के टैक्स लगाने के अधिकारों में कटौती की जाती है, तो इससे राज्य और स्थानीय Governmentों के लिए रेवेन्यू से जुड़ी नई चुनौती खड़ी हो सकती है.
सतीशन ने Prime Minister से अपील की है कि वे केरल की चिंताओं पर तुरंत ध्यान दें और यह पक्का करें कि राज्य के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों की रक्षा हो.
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एएसएच/डीकेपी