फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित कर्नाटक के डॉक्टर ने घर पर खुद को गोली मारकर की आत्महत्या

बेलगावी, 22 मई . फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित एक जाने-माने डॉक्टर ने Friday को बेलगावी शहर में अपने घर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली.

मृतक की पहचान डॉ. दिनेश भटकल के रूप में हुई है. उन्होंने केएलई संस्थान के साथ 40 वर्षों तक काम किया था. Police के अनुसार, दिनेश केएलई संस्थान द्वारा संचालित अस्पताल में प्रशासक के रूप में कार्यरत थे.

दिनेश मूल रूप से कारवार जिले के अंकोला शहर के रहने वाले थे और हाल ही में बेलगावी आकर बस गए थे. वह केएलई अस्पताल में फेफड़ों के कैंसर का इलाज करवा रहे थे.

Police ने बताया कि डॉक्टर सुबह अपने घर की गैलरी में गए और अपने सिर में गोली मार ली. Police को संदेह है कि बीमारी के कारण होने वाले असहनीय दर्द को न सह पाने के कारण उन्होंने यह चरम कदम उठाया.

Police ने आगे बताया कि डॉक्टर ने केएलई के मानद कार्यकारी अध्यक्ष प्रभाकर कोरे और डॉ. केरूर, जो उनका इलाज कर रहे थे, को व्‍हाट्सअप पर संदेश भेजे थे.

प्रभाकर कोरे को भेजे अपने संदेश में उन्होंने कथित तौर पर लिखा था कि आपने इन सभी वर्षों में मेरी मदद की है. हालांकि, मैं बहुत ज्‍यादा दर्द से गुजर रहा हूं और इन परिस्थितियों में मैंने यह कठिन निर्णय लिया है. यह मेरा निजी निर्णय है. कृपया मेरे परिवार की मदद करें और शहर के Police आयुक्त को भी सूचित करें.

चार महीने पहले उन्हें फेफड़ों का कैंसर होने का पता चला था. वह अक्सर अपने दोस्तों के साथ अपनी तकलीफों के बारे में बात करते थे.

Police ने वे मैसेज बरामद कर लिए हैं और मामले की जांच कर रही है.

गौरतलब है कि बसावा लेआउट की रहने वाली 23 साल की आयुर्वेदिक डॉक्टर, डॉ. एमयू निकिता ने 26 अप्रैल को चित्रदुर्ग जिले के होलालकेरे में आत्महत्या कर ली थी. वह एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर के साथ अपने नाम को जोड़ने वाली अफवाहों से काफी परेशान थीं.

उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके दोस्त और प्रोफेसर की पत्नी, प्रोफेसर के साथ उनके कथित रिश्ते को लेकर फैली अफवाहों के चलते उन्हें परेशान कर रहे थे.

एक और चौंकाने वाली घटना में, कारवार जिले के एक डॉक्टर ने कथित तौर पर जनवरी 2026 में अपने घर पर ही एक दो-नाली वाली बंदूक से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. बताया जा रहा है कि एक बिना पुष्टि वाले वायरल वीडियो को लेकर ऑनलाइन आलोचना का सामना करने के बाद वह मानसिक तनाव में थे.

Police के अनुसार, उस वीडियो में डॉक्टर पर एक मरीज को एक्सपायर्ड दवा देने का आरोप लगाया गया था. हालांकि, इस आरोप की कोई पुष्टि नहीं हुई थी. इसके बावजूद, वह वीडियो social media पर तेज़ी से फैल गया और कई लोगों ने ऑनलाइन डॉक्टर की आलोचना की और उन्हें बुरा-भला कहा, जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा.

एएसएच/डीएससी

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