
कोलकाता, 4 मई . पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करीमपुर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार समरेंद्रनाथ घोष ने जीत हासिल की, जबकि टीएमसी उम्मीदवार सोहम चक्रवर्ती को हार का सामना करना पड़ा.
विजेता उम्मीदवार को कुल 105,234 वोट मिले, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी सोहम को 95,049 वोट प्राप्त हुए. जीत का अंतर 10,185 वोट रहा. इस बार करीमपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस से पूजा परजीता रॉय चौधरी, सीपीएम से प्रभास मजूमदार, सहित 8 उम्मीदवार मैदान में थे.
करीमपुर नादिया जिले के तेहट्टा उपमंडल में स्थित एक ब्लॉक-स्तरीय जनगणना कस्बा है. यह 1951 से सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र रहा है. वर्ष 2010 में निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए परिसीमन के बाद इसकी वर्तमान सीमाओं में पूरा करीमपुर-1 ब्लॉक और करीमपुर-2 ब्लॉक की छह ग्राम पंचायतें शामिल हैं.
Political रूप से करीमपुर लंबे समय तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआईएम का मजबूत गढ़ रहा है. 1977 से 2006 के बीच हुए विधानसभा चुनावों में सीपीआईएम ने नौ बार जीत दर्ज की. कांग्रेस ने यहां चार बार जीत हासिल की, जबकि बांग्ला कांग्रेस और किसान मजदूर प्रजा पार्टी को एक-एक बार सफलता मिली.
तृणमूल कांग्रेस के उदय के साथ सीपीआईएम का वर्चस्व कमजोर हुआ. सीपीआईएम के समरेंद्रनाथ घोष ने 2011 में तृणमूल कांग्रेस के रामेन Government को 5,085 वोटों से हराकर आखिरी बार जीत दर्ज की थी. 2016 में तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने घोष को 15,989 वोटों से पराजित कर समीकरण बदल दिए. 2019 में मोइत्रा के Lok Sabha जाने के बाद बिमलेंदु सिन्हा रॉय ने भाजपा के जयप्रकाश मजूमदार को 23,910 वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी.
2021 में भी सिन्हा रॉय ने दोबारा जीत हासिल की और भाजपा उम्मीदवार समरेंद्रनाथ घोष को 23,575 वोटों से हराया.
Lok Sabha चुनावों में भी रुझान लगभग समान रहे हैं. 2019 में तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार इस क्षेत्र में 14,340 वोटों की बढ़त बनाई और भाजपा दूसरे स्थान पर आ गई. 2024 में यह बढ़त घटकर 12,323 वोट रह गई, लेकिन भाजपा ने खुद को एक मजबूत चुनौतीकर्ता के रूप में स्थापित कर लिया.
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ओपी/डीकेपी