पीएम मोदी पर अमर्यादित टिप्पणी पर भड़कीं ज्योति वाघमारे, बोलीं- संजय राउत बौखलाहट में दे रहे बयान

Mumbai , 13 जून . शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत द्वारा Prime Minister Narendra Modi के खिलाफ अशब्द बोलने पर सांसद ज्योति वाघमारे ने कहा कि पागलपन में बोले गए शब्दों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए.

ज्योति वाघमारे ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi की बढ़ती लोकप्रियता से विपक्ष बौखला गया है, इसलिए इस तरह की बयानबाजी की जा रही है. उन्होंने कहा कि इन बयानों को अधिक तूल नहीं देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि 2022 तक संजय राउत खुद पीएम मोदी की तारीफ करते नहीं थकते थे, आज वही पीएम मोदी के लिए ऐसे आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं. उनका कहना है कि अब बदलाव केवल उनकी नीति और नीयत में आया है, जबकि Prime Minister मोदी विकास की राजनीति पर काम कर रहे हैं.

ज्योति वाघमारे कहा, “मुझे लगता है कि संजय राउत ने हार मान ली है. उन्हें एहसास हो गया है कि वे एकनाथ शिंदे का सामना नहीं कर सकते, इसलिए उन्होंने हार मान ली है. चाणक्य की मशहूर कहावत के अनुसार, जब पूरा विपक्ष एकजुट होता है तो यह दिखाता है कि शासक ईमानदार है. अगर ये सभी पार्टियां एक साथ आ रही हैं तो इससे पता चलता है कि हमारे नेता, चाहे पीएम मोदी हों, अमित शाह, एकनाथ शिंदे या देवेंद्र फडणवीस, ईमानदार हैं और लोगों के लिए काम कर रहे हैं. इसी डर की वजह से वे एकजुट हो रहे हैं.”

उद्धव ठाकरे की पार्टी के सांसदों के शिंदे खेमे में जाने से जुड़ी कथित Political अटकलों को लेकर ज्योति वाघमारे ने कहा कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ का सही अर्थ यह नहीं है कि किसी एक पार्टी से लोगों को दूसरी पार्टी में लाया जाए. Maharashtra की जनता ने विधानसभा और Lok Sabha चुनावों में यह साबित कर दिया है कि असली ‘टाइगर’ एकनाथ शिंदे हैं. उन्होंने कहा, “हमारे नेता एकनाथ शिंदे ने न केवल सांसदों और विधायकों के लिए, बल्कि Maharashtra के आम लोगों, जिनमें किसान और मजदूर भी शामिल हैं, के लिए भी दरवाजे खुले रखे हैं. यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है.”

Maharashtra में गुटखा तस्करों पर मकोका के तहत कार्रवाई के आदेश को लेकर उन्होंने कहा कि तुकाराम मुंढे अपने निर्णयों के लिए अक्सर चर्चा में रहते हैं. उनके कई निर्णय जनता के हित में रहे हैं और यदि कोई अधिकारी जनहित में कार्य कर रहा है, तो उसका समर्थन किया जाना चाहिए.

स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो विवाद पर उन्होंने कहा कि एक महिला की गरिमा को मजाक का विषय बनाना स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक महिला के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और बाद में माफी मांगी गई, लेकिन ऐसी माफी स्वीकार नहीं की जानी चाहिए.

उन्होंने कहा, “हम महिलाओं के शरीर को वस्तु की तरह पेश करने पर आपत्ति जताते हैं. भारतीय संस्कृति में महिला को मां और देवी का दर्जा दिया जाता है. अगर आप किसी महिला की कीमत 370 रुपए की बिरयानी के बराबर आंकते हैं और बाद में माफी मांगते हैं तो वह माफी स्वीकार्य नहीं है. India की महिलाएं ऐसे व्यवहार का कड़ा विरोध करेंगी. मैं प्रणित मोरे से पूछना चाहती हूं कि अगर कोई आपकी मां या बहन के बारे में ऐसी बात कहे और बाद में माफी मांगे, तो क्या वह स्वीकार्य होगा? एक सांसद के तौर पर, मैं आने वाले सत्र में महिलाओं को निशाना बनाने वाली और सस्ते मजाक के लिए बॉडी शेमिंग करने वाली ऐसी भद्दी कॉमेडी के खिलाफ यह मुद्दा उठाऊंगी.”

आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के घर पर बुलडोजर चलाने के फैसले को लेकर उन्होंने कहा, “एक बेटी जिसका आखिरी सांस तक शोषण हुआ, एक बेटी जो अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उस बेटी के लिए उसकी मां, जिसने उसे नौ महीने तक अपनी कोख में पाला और न्याय के लिए लड़ाई लड़ी, मजबूती से खड़ी रही. इस लड़ाई में Prime Minister Narendra Modi ने भी ताकत बनकर उनका साथ दिया, और बंगाल में आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज की पीड़िता की मां को न्याय मिला. मुझे लगता है कि जिन दरिंदों ने न तो बेटी की चीखें सुनीं और न ही मां का रुदन, अगर अब उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है, तो इससे एक कड़ा संदेश जाता है. यह दिखाता है कि अगर कोई इतनी क्रूरता और बर्बरता करता है, तो उसे इसके नतीजे भुगतने होंगे.”

पीआईएम/डीकेपी

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