जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल की बैठक, सरकारी नौकरियों में आरक्षण नीति समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा

श्रीनगर, 23 जून . जम्मू-कश्मीर के Chief Minister उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में Tuesday को मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई. बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें Governmentी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण से संबंधित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिशों पर केंद्र Government की प्रतिक्रिया भी शामिल रही.

Chief Minister कार्यालय ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक संदेश में कहा कि सिविल सचिवालय, श्रीनगर में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में शासन व्यवस्था को मजबूत करने, विकास कार्यों में तेजी लाने और जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों और नीतिगत विषयों पर विचार-विमर्श किया गया.

बता दें कि 10 दिसंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया था. इस उपसमिति ने लगभग छह महीने बाद 10 जून 2025 को अपनी रिपोर्ट Government को सौंपी थी.

इसके बाद मंत्रिमंडल ने विभाग से सलाह ली और रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया. 4 दिसंबर 2025 को मंत्रिमंडल ने इस रिपोर्ट को मंजूरी देकर उपGovernor को भेज दिया था.

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि खुली मेरिट (ओपन मेरिट) श्रेणी के लिए Governmentी नौकरियों और शैक्षणिक सीटों का 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाए.

फिलहाल, जम्मू-कश्मीर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सहित विभिन्न श्रेणियों के लिए कुल आरक्षण 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. इसके कारण खुली मेरिट वर्ग के लिए केवल 30 प्रतिशत नौकरियां और सीटें बचती हैं, जिससे युवाओं में असंतोष देखा जा रहा है.

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार अनुसूचित जनजाति-1, अनुसूचित जनजाति-2, पिछड़ा क्षेत्र निवासी (आरबीए) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10-10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है.

इसके अलावा अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को 8-8 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है, जबकि वास्तविक नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की श्रेणी को 4 प्रतिशत आरक्षण मिलता है.

इसके साथ ही 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण भी लागू है, जिसमें 6 प्रतिशत पूर्व सैनिकों और 4 प्रतिशत दिव्यांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित है.

हालांकि, उपGovernor ने इस रिपोर्ट को मंजूरी नहीं दी थी और गृह मंत्रालय की टिप्पणियों के साथ इसे वापस जम्मू-कश्मीर Government को भेज दिया था.

अब जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल ऐसा रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहा है, जिससे Governmentी नौकरियों की भर्ती और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए खुली मेरिट का हिस्सा कम से कम 40 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सके.

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एएमटी/डीकेपी

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