
New Delhi, 15 मार्च . पूर्व Union Minister और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक बार फिर विदेशी नीति पर Prime Minister Narendra Modi पर कटाक्ष किया है, वहीं पूर्व Prime Minister डॉ. मनमोहन सिंह की तारीफ की है.
जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, “1990 के दशक के उत्तरार्ध में India ने भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाओं का पता लगाना शुरू किया था. अंततः तेहरान में आयोजित 16वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने इन योजनाओं को नई गति दी और मई 2013 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चाबहार में शुरुआती निवेश के लिए 115 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी. यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि यह निर्णय तब लिया गया था, जब India अक्टूबर 2008 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा था.”
कांग्रेस नेता ने आगे लिखा, “इसके बाद अक्टूबर 2014 में मोदी Government ने अपनी हमेशा की प्रवृत्ति के अनुसार डॉ. मनमोहन सिंह की चाबहार पहल को नए रूप में प्रस्तुत किया और इसे मोदी के दृष्टिकोण का हिस्सा बताया. 2026-27 के बजट में चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया. क्या इसका मतलब यह है कि India ने इस परियोजना से हाथ खींच लिया है या फिर उसकी निवेश संबंधी प्रतिबद्धताएं फिलहाल पूरी हो चुकी हैं? किसी भी स्थिति में चाबहार, जो चीन द्वारा निर्मित Pakistan के ग्वादर बंदरगाह से लगभग 170 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है, अब नजरों में नहीं है. यह India की मध्य एशियाई कूटनीति के लिए दूसरा रणनीतिक झटका है, जो ताजिकिस्तान के दुशांबे के पास ऐनी में स्थित वायु सेना अड्डे को बंद करने के बाद आया है.”
वहीं, 14 मार्च की देर रात जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट पर लिखा है, “छह महीने पहले कांग्रेस ने सोनम वांगचुक के फैसले की निंदा की थी. अब मोदी Government ने वांगचुक पर एनएसए की कार्रवाई रद्द कर पूरी तरह से यू-टर्न ले लिया है. उसका पर्दाफाश हो गया है. Government को न केवल वांगचुक और उनके परिवार से, बल्कि लद्दाख की जनता से भी माफी मांगनी चाहिए. शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करने के लिए हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तुरंत रिहा करना चाहिए.”
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ओपी/वीसी