इटली के विदेश मंत्री बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में बतौर ‘पर्यवेक्षक’ शामिल होंगे

रोम, 18 फरवरी . इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में बतौर पर्यवेक्षक शामिल होंगे. स्थानीय मीडिया ने इसकी जानकारी दी है. इससे पहले ईयू आयोग भी बोर्ड में बतौर पर्यवेक्षक शामिल होने का फैसला ले चुका है.

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने कहा है कि इटली, अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के “बोर्ड ऑफ पीस” की पहली बैठक में “पर्यवेक्षक” के तौर पर मौजूद रहेगा.

एएनएसए न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तजानी ने कहा, “मैं बोर्ड ऑफ पीस की इस पहली बैठक में इटली का प्रतिनिधित्व करने के लिए वॉशिंगटन जाऊंगा, ताकि जब बातचीत हो और गाजा के पुनर्निर्माण और फिलिस्तीन के भविष्य के लिए फैसले लिए जाएं, तो मैं वहां मौजूद रह सकूं.”

यह बोर्ड, जिसके चेयरमैन ट्रंप हैं, शुरू में हमास-इजरायल के बीच युद्ध के बाद इलाके के रिकंस्ट्रक्शन की देखरेख के लिए बनाया गया था. लेकिन अब इसका मकसद सभी तरह के इंटरनेशनल झगड़ों को सुलझाना बन गया है, जिससे यह डर पैदा हो गया है कि यूएस President संयुक्त राष्ट्र का एक प्रतिद्वंदी बनाना चाहते हैं.

पहली मीटिंग Thursday को वॉशिंगटन में होने वाली है.

हालांकि इससे पहले इटली इसमें शामिल होने से साफ इनकार कर चुका है. कहा गया था कि देश सिर्फ एक ऑब्जर्वर के तौर पर मौजूद नहीं रह सकता क्योंकि देश के संवैधानिक नियम उसे किसी एक विदेशी लीडर की अगुवाई वाले संगठन में शामिल होने की इजाजत नहीं देते.

इस सबके बावजूद तजानी का कहना है कि रोम के लिए यह जरूरी है कि वह “सबसे आगे रहे, और जो हो रहा है उसे सुने.”

जबसे ट्रंप ने जनवरी में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपना “बोर्ड ऑफ पीस” लॉन्च किया है, तब से करीब 19 देशों ने इसके घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. कई देश साफ कर चुके हैं कि वे मौजूदा प्रारूप में इसमें शामिल नहीं होना चाहते हैं.

वहीं, ट्रंप की विचारधारा का मुखर विरोध करने वाले ईयू कमीशन ने भी पहली बैठक में शामिल होने का फैसला कर लिया है. ईयू आयोग की कमिश्नर सुइका बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में बतौर पर्यवेक्षक शामिल होंगी.

प्रवक्ता गिलौम मर्सियर ने Monday (16 फरवरी) को पत्रकारों से कहा, “ईयू कमीशन बोर्ड ऑफ पीस का सदस्य नहीं बन रहा है; हम इस बैठक में गाजा में सीजफायर लागू करने के अपने पुराने संकल्प के साथ-साथ गाजा में पुनर्निर्माण के लिए की जा रही अंतर्राष्ट्रीय कोशिशों में हिस्सा लेने के लिए इसमें शामिल होंगे.”

दरअसल, ईयू फिलिस्तीनियों को मानवीय मदद देने वाला सबसे बड़ा दानकर्ता है. 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल और हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ईयू ने इन इलाकों को कुल 1.65 बिलियन यूरो का योगदान दिया है. यही वजह है कि ईयू नहीं चाहता कि यूएस उसे दरकिनार कर किसी भी पुनर्निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाए.

केआर/

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